ब्लिट्ज ब्यूरो
लखनऊ। प्रदेश की योगी सरकार की कैबिनेट ने हाल ही में एक बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश में स्वजनों को प्रॉपर्टी गिफ्ट करने पर स्टांप ड्यूटी शुल्क पर कम खर्च करना होगा। इस प्रस्ताव को यूपी कैबिनेट की बैठक में स्वीकृति दे दी गई है।
परिवार में अगर कोई रक्त संबंधी (ब्लड रिलेशन) को अपनी कॉमर्शियल या इंडस्टि्रयल प्रॉपर्टी गिफ्ट करता है तो अभी उसे शहरी क्षेत्र में सर्कल रेट का 7 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में 5 प्रतिशत बतौर स्टांप फीस देनी होती है। ऐसे में शहरी क्षेत्र में 1 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी को गिफ्ट करने पर 7 लाख रुपये स्टांप फीस देनी पड़ती है। योगी सरकार ने इसमें बड़ी राहत देते हुए यह रकम घटाकर महज 5 हजार रुपये कर दी है। सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई प्रदेश कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन मंत्री रवींद्र जायसवाल के अनुसार रजिस्ट्री एक्ट के तहत अचल संपत्ति को गिफ्ट करने पर उसका रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। इसके साथ ही सर्कल रेट के हिसाब से इस पर स्टांप ड्यूटी भी देनी पड़ती है। 3 अगस्त 2023 को सरकार ने अधिसूचना जारी कर आवासीय एवं कृषि संपत्तियों के दान व बंटवारे की प्रक्रिया आसान करने के लिए स्टांप शुल्क घटाकर 5 हजार रुपये कर दिया था, लेकिन कॉमर्शियल व इंडस्टि्रयल प्रॉपर्टी पर सर्कल रेट के आधार पर प्रॉपर्टी के मूल्य की 5 से 7 प्रतिशत तक स्टांप ड्यूटी देनी पड़ती थी। अब सरकार ने कॉमर्शियल और इंडस्टि्रयल प्रॉपर्टी के गिफ्ट में राहत देते हुए 5000 रुपये स्टांप फीस तय कर दी है। इससे परिवारों के बीच संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और कम खर्चीली हो जाएगी।
उच्च शिक्षा से जुड़े दो अहम प्रस्ताव मंजूर
यह राहत रक्त संबंधी पुत्र-पुत्री, माता-पिता, पति-पत्नी, पुत्रवधू, भाई-बहन, दामाद, नाती, पोता/पोती, सगे भाई की मृत्यु पर होने उसकी पत्नी पर लागू होगी।
कैबिनेट में पास अन्य फैसले
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा से जुड़े दो अहम प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। बैठक में कुल 13 प्रस्ताव पास हुए। बैठक में यूपी वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) नीति-2024 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नियमावली-2025 को मंजूरी प्रदान की गई है। इस नियमावली के लागू होने से प्रदेश को वैश्विक निवेश, उच्च स्तरीय सेवाओं और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन में नई गति मिलेगी। नियमावली के अंतर्गत इन्वेस्ट यूपी को नोडल एजेंसी नामित किया गया है। यह नियमावली जीसीसी नीति-2024 के प्रख्यापन की तिथि से प्रभावी मानी जाएगी और राज्य सरकार द्वारा संशोधन अथवा समाप्त किए जाने तक लागू रहेगी।
औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कैबिनेट के निर्णय के विषय में बताया कि प्रदेश में निवेश का माहौल बेहतर हुआ है जिसके चलते निवेश करने के लिए उद्योग घराने और मल्टीनेशनल कंपनियां हमारे संपर्क में हैं। जीसीसी नीति हमारे लिए बहुत लाभप्रद है और आज हम इसकी एसओपी लेकर आए हैं। यूपी में जीसीसी के निवेश में लगातार वृद्धि हो रही है।
चालू वित्तीय वर्ष में 21 कंपनियों ने इसमें निवेश प्रारंभ कर दिया है। इसके माध्यम से प्रदेश में व्यापक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। नियमावली के अनुसार, जीसीसी किसी भारतीय अथवा विदेशी कंपनी द्वारा स्थापित एक कैप्टिव इकाई होगी, जो सूचना प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी), वित्त, मानव संसाधन, डिजाइन, इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स और नॉलेज सर्विसेज जैसे रणनीतिक कार्यों का निष्पादन करेगी। इसके अलावा पीलीभीत में दो बस अड्डे बनाने के लिए जमीन दिए जाने के फैसले पर भी मुहर लग गई है। साथ ही वाराणसी में 500 बिस्तर का सुपर स्पेशलिटी अस्पताल भी बनेगा।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा से जुड़े दो अहम प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने फर्जी डिग्री और गंभीर अनियमितताओं के आरोपों के चलते जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद (फिरोजाबाद) के परिसमापन का फैसला किया है। परिसमापन के बाद विश्वविद्यालय के अभिलेख डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के संरक्षण में रहेंगे और डिग्रियों का सत्यापन वहीं से किया जाएगा।
प्राधिकार पत्र (एलओपी) जारी करने को भी स्वीकृति
दूसरे अहम फैसले में, आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा में ऑफ-कैंपस के संचालन के लिए प्राधिकार पत्र (एलओपी) जारी करने को भी मंजूरी दी गई है। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर क्षेत्र में उच्च शिक्षा के नए अवसर सृजित होंगे और छात्रों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी।

























