ब्लिट्ज ब्यूरो
अहमदाबाद। भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक साझेदारी के 25 साल और राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के मौके पर जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज दो दिवसीय भारत दौरे पर आए। इस दौरान दोनों देशों के नेताओं ने एक ही कार में यात्रा की। दोनों नेताओं के बीच खास किस्म की गर्मजोशी दिखी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ कार वाली तस्वीर एक्स पर शेयर की। इस दौरान उन्होंने कहा कि साझा मूल्य, व्यापक सहयोग और आपसी समझ से भारत और जर्मनी के बीच दोस्ती लगातार बढ़ रही है। पहले दिन पीएम मोदी ने फ्रेडरिक के साथ गुजरात के ऐतिहासिक साबरमती गांधी आश्रम का दौरा किया। साथ ही साबरमती रिवरफ्रंट पर ओपन कार में यात्रा की। इस दौरान दोनों नेताओं ने पतंग भी उड़ाई ।
जर्मन चांसलर ने पीएम मोदी की तरफ से गुजरात आमंत्रण को लेकर आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा, ‘आपने मुझे अपने गृह राज्य गुजरात आने का न्योता दिया। इस खास जेस्चर के लिए आपका दिल से शुक्रिया अदा करता हूं। यह हमारे दोनों देशों के बीच गहरे रिश्तों की निशानी है। यह मेरे प्रति आपकी दोस्ती का भी सबूत है।’
भारत से रिश्तों पर क्या बोले जर्मन चांसलर?
दोनों ने नेताओं ने औपचारिक तौर पर प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता में भाग लिया, साथ ही एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। फ्रेडरिक ने भारत को डिजायर्ड और पसंदीदा पार्टनर बताया। उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच आर्थिक संबंधों की पूरी क्षमता का दोहन करने के लिए हमें भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक फ्री ट्रेड समझौते पर बातचीत करने की आवश्यकता है। दोनों देशों ने विकास, प्रोडक्शन, नवाचार और सप्लाई चैन को बढ़ाने के लिए रक्षा क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर जोर देते हुए एक समझौते पर हस्ताक्षर भी किए। इस दौरान फ्रेडरिक ने कहा कि दोनों देश अपने रक्षा उद्योगों के सहयोग को मजबूत करना चाहते हैं। इसका रणनीतिक महत्व है। दोनों देशों ने इसको लेकर हस्ताक्षर किए हैं।
मोदी ने इस बात के लिए जताया जर्मन चांसलर का आभार
पीएम मोदी ने चांसलर मर्ज को एशिया के पहले दौरे पर भारत को चुनने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा जर्मनी की रणनीति में भारत की भूमिका को दर्शाती है। यह दोनों देशों के बीच उच्च स्तर के विश्वास का प्रतीक है। पीएम मोदी ने कहा, ‘हमने इस सहज आर्थिक साझेदारी को असीमित बनाने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि पारंपरिक आर्थिक क्षेत्रों के साथ-साथ अब रणनीतिक क्षेत्रों में भी मजबूती से सहयोग होगा। रक्षा क्षेत्र में हम एक संयुक्त घोषणा पत्र का आदान-प्रदान कर रहे हैं।’
































