ब्लिट्ज ब्यूरो
लखनऊ। राजधानी लखनऊ की बिजली व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालने के लिए एक बड़ी योजना तैयार की गई है। केंद्र सरकार की आर्थिक मदद से राजधानी में 27 नए उपकेंद्र बनाए जाएंगे। लगभग 250 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य शहर की बिजली आपूर्ति में सुधार करना और आने वाले समय में होने वाले लोड को संभालना है। इससे लगभग 15 लाख आबादी को बिजली कटौती व लो-वोल्टेज की समस्या से लाभ मिलेगा। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक लखनऊ सेंट्रल में पांच, गोमतीनगर तीन, जानकीपुरम छह और अमौसी जोन में 13 उपकेंद्र प्रस्तावित हैं।
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी रिया केजरीवाल ने बताया कि आधुनिकीकरण की इस योजना से शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की विद्युत व्यवस्था में भी व्यापक सुधार होगा। वर्तमान में इसका औपचारिक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजेगा, ताकि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जा सके। आबादी बढ़ने के साथ बिजली की खपत भी बढ़ेगी। घरेलू और व्यावसायिक जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार के सहयोग से नए उपकेंद्र का निर्माण प्रस्तावित है।
अमौसी जोन
सबसे अधिक 13 नए बिजली उपकेंद्र बनाए जाएंगे। मोहनलालगंज, नादरगंज, दुबग्गा और काकोरी जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में बढ़ती हाउसिंग सोसायटियों और व्यावसायिक गतिविधियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
जानकीपुरम जोन
06 नए बिजली उपकेंद्र प्रस्तावित हैं। मुख्य अभियंता वीपी सिंह के अनुसार, यदि अगले दो वर्षों में न्यू कैम्पस, दाउदनगर और फैजुल्लागंज जैसे क्षेत्रों में ये उपकेंद्र नहीं बने, तो उपभोक्ताओं को गंभीर बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है।
लखनऊ मध्य जोन
न्यू ऐशबाग, न्यू तालकटोरा, मल्लपुर और ठाकुरगंज सहित कुल 5 नए बिजली उपकेंद्र बनाने का ब्लू प्रिंट तैयार किया गया है।
गोमतीनगर जोन
32 करोड़ रुपये की लागत से 03 बिजली उपकेंद्र बनेंगे, जो मुर्दहिया (इंदिरा नगर), पपनामऊ और भैसोरा में स्थित होंगे। यहां पर बिजली के व्यावसायिक प्रयोग की उम्मीद है।
































