ब्लिट्ज ब्यूरो
लखनऊ। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा पेश किए गए ₹9.12 लाख करोड़ के इस बजट में राज्य के बुनियादी ढांचे और जन-कल्याण पर विशेष ध्यान दिया गया है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार ने लंबी छलांग लगाते हुए ₹37,956 करोड़ की व्यवस्था प्रस्तावित की है, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है।
यह वृद्धि दर्शाती है कि सरकार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को विश्वस्तरीय बनाने और हर नागरिक तक बेहतर चिकित्सा सुविधा पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। बजट में ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन से लेकर गंभीर बीमारियों के टीकाकरण और श्रमिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य योजनाओं का समावेश किया गया है। शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य के इस त्रिकोण पर आधारित बजट ने राज्य को एक ‘स्वस्थ प्रदेश’ बनाने की दिशा में नए दरवाजे खोल दिए हैं। विशेष रूप से आयुष्मान भारत और जिला अस्पतालों के मजबूती के लिए किए गए आवंटन से आम आदमी को सीधे तौर पर लाभ मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश के सभी जनपदों में जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रसव के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को ‘गारन्टीड कैशलेस डिलीवरी’ सेवा प्रदान करना है, जिससे सरकारी अस्पतालों में इलाज का आर्थिक बोझ शून्य हो सके। इसके साथ ही, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत हर ब्लॉक में दो मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं। ये टीमें आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में जाकर बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं, ताकि शुरुआती चरण में ही बीमारियों की पहचान कर उनका समय पर उपचार किया जा सके और एक स्वस्थ भविष्य की नींव रखी जा सके।
श्रमिकों के लिए मोबाइल हेल्थ वैन और पोलियो मुक्त भविष्य
उत्तर प्रदेश सरकार ने पहली बार निर्माण श्रमिकों के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए मोबाइल हेल्थ वैन का संचालन पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया है। यह वैन निर्माण स्थलों पर जाकर श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण करेगी और उन्हें स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान करेगी। वहीं, संक्रामक रोगों के खिलाफ जंग को तेज करते हुए सरकार ने पल्स पोलियो अभियान के तहत 3.28 करोड़ से अधिक बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाने का लक्ष्य हासिल किया है। जापानी इन्सेफिलाईटिस से बचाव के लिए प्रदेश के संवेदनशील 42 जनपदों में टीकाकरण कार्यक्रम को निर्बाध रूप से संचालित किया जा रहा है।
पीजीआई के लिए 2,446 करोड़ रुपये आवंटित
संजय गांधी पीजीआई को विश्व स्तर का चिकित्सा संस्थान बनाने के लिए सरकार ने धनवर्षा की है। संस्थान के बजट में करीब दोगुने का इजाफा करते हुए इस वर्ष 2,446 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। बीते साल का बजट 1292 करोड़ रुपये था। बढ़ा हुआ बजट मुख्य रूप से संस्थान को क्वाटर्नरी हेल्थ केयर चिकित्सा केंद्र बनाने के लिए है। संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमन ने बताया कि संस्थान को 359 करोड़ रुपये निर्माण कार्यों के लिए मिले हैं। निर्माण कार्य और उपकरण व संयंत्र के लिए जो राशि आवंटित की गई है, उसका उपयोग क्वाटर्नरी हेल्थ केयर चिकित्सा केंद्र स्थापित करने में किया जाएगा।
आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का विस्तार
गरीब परिवारों को महंगे इलाज से बचाने के लिए आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत लाभार्थी परिवारों की संख्या अब 49.22 लाख तक पहुंच गई है। इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने ₹500 करोड़ की व्यवस्था प्रस्तावित की है। इसके अलावा, आयुष्मान भारत नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन मिशन के लिए ₹2,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं। यह भारी-भरकम धनराशि सुनिश्चित करेगी कि प्रदेश का कोई भी गरीब व्यक्ति पैसे की कमी के कारण इलाज से वंचित न रहे। यह योजना निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों में कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान कर आम जनमानस के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो रही है।





























