ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।वैश्विक इलेक्टि्रक वाहन (ईवी) दौड़ में भारत की स्थिति चीन, यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका से अलग है।
जहां विकसित अर्थव्यवस्थाएं पैसेंजर ईवी को अपनाने पर जोर दे रही हैं, वहीं भारत की बढ़त मुख्य रूप से मास मोबिलिटी सेगमेंट—खास तौर पर दो-पहिया और तीन-पहिया वाहनों—पर केंद्रित है।
नीति अायोग के अनुसार, देश का लक्ष्य 2030 तक ईवी की पहुंच को 30 प्रतिशत तक बढ़ाना है, जिसे मांग बढ़ाने वाले प्रोत्साहन और मैन्युफैक्चरिंग नीतियों का समर्थन प्राप्त है।
भारत की प्रतिस्पर्धी बढ़त कम लागत वाले उत्पादन और एक बड़े घरेलू बाजार में निहित है। हालांकि, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, उन्नत ईवी तकनीकों और निर्यात के पैमाने के मामले में यह वैश्विक दिग्गजों से पीछे है।
इन सीमाओं के बावजूद, भारत किफायती इलेक्टि्रक मोबिलिटी के लिए एक प्रमुख बाजार के रूप में उभर रहा है, और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को कम लागत वाले ईवी समाधान उपलब्ध कराने में इसकी अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है।













