ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। डीआरडीओ का मल्टी लेयर्ड बैलिस्टिक डिफेंस सिस्टम का टेस्ट कामयाब रहा है। इसकी बदौलत 5000 कमी से आ रही दुश्मन मिसाइल को मार गिराया जाएगा।
यह तकनीक हासिल करने वाला भारत 5वां देश बन गया है। बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम का परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर रेंज में किया गया। इस टेस्ट के लिए यहां 11 गांव खाली कराए गए थे।
भारत अब लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों, यहां तक कि इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल के खतरों का भी मुकाबला कर सकता है। डीआरडीओ ने पिछले सप्ताह लगातार 3 फ्लाइट टेस्ट किए, जिनमें मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (बीएमडी) सिस्टम का प्रदर्शन किया गया। इसमें इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) क्लास तक के खतरों को रोकने और बेअसर करने की क्षमता भी शामिल है।
यह स्वदेशी तकनीक दुश्मन की मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले हवा में ही नष्ट कर देती है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने टेस्टिंग की तस्वीरें X अकाउंट पर शेयर भी की हैं। इसके साथ-साथ नेवल एंटी शिप मिसाइल-मीडियम रेंज का भी टेस्ट किया गया। इसे भारत की समुद्री स्ट्राइक और डिफेंस स्किल को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। भारत अब उन खास देशों के ग्रुप में शामिल हो गया है, जिनके पास ऑपरेशनल-लेवल की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता है। भारत से पहले यह तकनीक अमेरिका, रूस, इजराइल और चीन के पास थी।
क्या होती है इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल
आसान भाषा में इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल को बहुत लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल कहा जा सकता है। यह ऐसी मिसाइल होती है जो एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक पहुंच सकती है। आमतौर पर 5,500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार कर सकती है। इसके अलावा यह परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम होती है।
यह मिसाइल रॉकेट की तरह ऊपर अंतरिक्ष की ओर जाती है, फिर बहुत ऊंचाई से पृथ्वी की ओर लौटती है और बहुत तेज स्पीड से टारगेट पर हमला करती है। इसी वजह से इसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली रणनीतिक हथियारों में गिना जाता है।













