ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा का सपना तो हर हिंदू भारतीय का रहता है लेकिन, दुर्गम रास्ते और मौसम की मार की वजह से बहुत सारे लोग पीछे हट जाते हैं। अब ऐसा नहीं होगा, क्योंकि हिमालय का सीना चीरकर भारत ने सिलक्यारा से पोलगांव तक टनल बना ली है। अब न सिर्फ चारधाम यात्रा आसान होगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी आवाजाही सरल हो जाएगी।
सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग को सिलक्यारा बेंड-बारकोट सुरंग के नाम से भी जाना जाता है। यह सुरंग उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में चारधाम महामार्ग परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हिमालय क्षेत्र में बनाई जा रही इस सुरंग का मकसद गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के बीच की दूरी को कम करना और आवाजाही को आसान बनाना है। इसमें सबसे बड़ी चुनौती सुरंग की आरपार खुदाई करना थी।
इस सुरंग को बनाना कितना चुनौतीपूर्ण काम था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज 4.5 किलोमीटर की खुदाई करने में करीब 3 साल का समय लग गया। साल 2023 में इसकी खुदाई शुरू हुई थी और अब जाकर आरपार सुरंग को खोदा जा सका है। नवंबर, 2023 में खुदाई के समय सुरंग का एक हिस्सा ढह गया था, जिसमें करीब 41 मजदूर फंस गए थे। 17 दिन तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के बाद इन सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया। सुरंग की लंबाई 4.53 किलोमीटर है और इसे बनाने का काम अब अंतिम चरण में है।
घोड़े की नाल की आकार की इस सुरंग को ऑस्टि्रयन टनलिंग मैथड से बनाया गया है, जो हिमालयी क्षेत्रों के भूकंप के झटकों को सहने में सक्षम है। राष्ट्रीय राजमार्ग 134 पर बनी यह सुरंग रादी पास के नीचे से गुजरती है और चार धाम यात्रा के लिए ऑल वेदर कनेक्टिविटी प्रदान करती है। इस सुरंग के तैयार होने के बाद गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा किसी भी मौसम में की जा सकेगी। यह क्षेत्र भूकंप, बाढ़ और भारी बर्फबारी से प्रभावित रहते हैं, लेकिन सुरंग बनाने के बाद इन सभी चुनौतियों से आसानी से निपटा जा सकेगा।
सुरंग के भीतर वेंटिलेशन सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट और मजबूत इन्फ्रा लगाया गया है, ताकि भूकंप से हर हाल में सुरक्षित रहा जा सके. इसे बनाने की अनुमानित लागत करीब 1,384 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसमें से निर्माण की लागत करीब 1,100 करोड़ रुपये है, बाकी पैसा भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और अन्य निर्माण पूर्व खर्चों में लगाया गया। हालांकि, इसे बनाने में कुछ देरी हुई है, जिसकी वजह से परियोजना की लागत भी कुछ बढ़ सकती है।
अभी सिलक्यारा से पोलगांव तक जाने के लिए राडी टॉप से होकर जाना पड़ता है। इसमें करीब डेढ़ से 2 घंटे का समय लगता है। सुरंग पूरी होने के बाद यह दूरी 26 किलोमीटर कम हो जाएगी और यात्रा का समय भी महज 15 मिनट का होगा। कुल दूरी भी महज 4.5 किलोमीटर की रह जाएगी और आवाजाही में ईंन्धन की बचत के साथ समय की भी सेविंग होगी। सुरंग का सबसे बड़ा फायदा चार धाम यात्रा करने वालों को होगा। अभी चार धाम यात्रा सिर्फ गर्मी के मौसम में ही पूरी की जाती है और सर्दियों में बर्फबारी की वजह से बंद रहती है लेकिन, सुरंग तैयार होने के बाद किसी भी मौसम में चारधाम यात्रा को पूरा किया जा सकेगा।
– आसान होगी चारधाम यात्रा
– 15 मिनट में पूरा होगा 2 घंटे का सफर
































