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थर-थर कांपेगा चीन

थर-थर कांपेगा चीन
आस्था भट्टाचार्य

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में क्वाड राष्ट्र के प्रमुख नेताओं से मिले और उन्हें 28वें मालाबार नौसैनिक युद्धाभ्यास में भाग लेने का आमंत्रण दिया। इस साल अक्टूबर में होने वाली इस समुद्री मिलिट्री एक्सरसाइज में भारतीय नौसेना के साथ-साथ जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की नेवी भी भाग लेगी। उनके खतरनाक जंगी जहाज बंगाल की खाड़ी में आएंगे।

– मोदी ने क्वाड नेताओं को दिया नौसैनिक युद्धाभ्यास में भाग लेने का आमंत्रण

इस युद्धाभ्यास में चारों देश आपसी कॉर्डिनेशन, अत्याधुनिक हथियारों से लैस युद्धपोतों, पनडुब्बियों का प्रदर्शन करेंगे। मैरीटाइम कॉपरेशन और पावर प्रोजेक्शन पर काम करेंगे ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन और उसके साथी देश नजर उठाने की हिम्मत भी न करें। इस युद्धाभ्यास की शुरूआत 1992 में भारत और अमेरिकी नौसेना ने की थी।

2007 से इसमें जापान और ऑस्ट्रेलिया भी जुड़ गए। 2015 में जापान इसका स्थायी सदस्य बन गया। ऑस्ट्रेलिया 2020 से लगातार युद्धाभ्यास में भाग ले रहा है। अब चारों देश मिलकर इस नौसैनिक अभ्यास को पूरा करते हैं। इस बार के युद्धाभ्यास का फोकस चीन की तरफ से बढ़ रहे खतरे को काउंटर करने के तरीकों को लेकर है। इन तैयारियों से चीन के पसीने छूटने जा रहे हैं, इस बात में कोई शक नहीं।

भारतीय नौसेना
इंडियन नेवी इस युद्धाभ्यास का नेतृत्व कर रही है। इसमें नौसेना का एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्य, तलवार क्लास फ्रिगेट, कलवारी क्लास पनडुब्बियां शामिल होंगी। इसके अलावा नौसेना के मिग-29के फाइटर जेट और पी-8आई पोसाइडन जासूसी जहाज भी शामिल होगा। फोकस एरिया होगा एंटी-सबमरीन, रीकॉन्सेंस मिशन पूरा करना, भारतीय समुद्री क्षेत्र की हिफाजत करना।

अमेरिकी नौसेना
उम्मीद है कि अमेरिकी नौसेना अपने निमित्ज क्लास एयरक्राफ्ट कैरियर में से किसी एक को बंगाल की खाड़ी में भेजे। इसके अलावा कुछ विध्वंसक और पनडुब्बियां भी आएंगी। साथ में एफ-18 सुपर हॉर्नेट फाइटर जेट्स, हॉकआई एयरक्राफ्ट भी आएंगे। हो सकता है कि अमेरिका अपना लेटेस्ट अर्लीघ बुर्क क्लास गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर इस युद्धाभ्यास में भेजे। इसमें ऐजिक कंबैट सिस्टम लगा है।

जापानी नौसेना…
जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स की तरफ से इजूमो क्लास हेलिकॉप्टर कैरियर्स आएंगे। इस पर एफ-35बी फाइटर जेट का परीक्षण हाल ही में हुआ है। इसके अलावा जापान एजीस से लैस डेस्ट्रॉयर, माया क्लास डेस्ट्रॉयर भी भेज सकता है। इसमें मिसाइल डिफेंस सिस्टम और एंटी-एयरक्राफ्ट वारफेयर की तकनीक लगी है। फोकस एरिया क्षेत्रीय समुद्री इलाके को सुरक्षित रखना। ताकि चीनी नौसेना किसी तरह की गलत हरकत न कर पाए।

ऑस्ट्रेलियाई नौसेना
रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी की तरफ से होबार्ट क्लास डेस्ट्रॉयर्स और एनजैक क्लास फ्रिगेट आएंगे। साथ में कोलिंस क्लास सबमरीन भी आए। फोकस रहेगा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर पर। ऑस्ट्रेलियाई एमएच-60आर सीहॉक हेलिकॉप्टर्स भी इस युद्धाभ्यास में भाग लेने वाले हैं जो रीकॉन्सेंस और सर्विलांस में मदद करेंगे।

इंडो-पैसिफिक सिक्योरिटी नेटवर्क को मजबूत करने का इरादा
इन अभ्यासों से क्वाड देशों की नौसेनाओं के बीच सहयोग और समन्वय में वृद्धि होगी, जिससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता में योगदान होगा।
इस युद्धाभ्यास में वायु युद्ध, समुद्री अवरोध, पनडुब्बी रोधी युद्ध, सामुद्रिक संचालन और वायु रक्षा क्षमता का प्रदर्शन किया जाएगा। चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों के मद्देनज़र, यह अभ्यास क्वाड देशों की प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करता है।

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