ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। पहले यूरोपीय यूनियन (ईयू) के 27 देशों के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) हुआ। फिर अमेरिका ने भारत से आने वाले सामानों पर टैरिफ ) की कुल दर 50% से कम करके 18% किया। इससे भारत के हस्तशिल्प निर्यातक उत्साहित हैं। हालांकि, इनका कहना है कि अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के देश में पैठ बढ़ाने के लिए लगातार डिजाइन और प्रोडक्ट की क्वालिटी पर ध्यान देना होगा।
एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल फोर हैंडिक्राफ्ट्स के महानिदेशक राकेश कुमार ने दिल्ली फेयर स्प्रिंग 2026 शुरू होने से पहले यह बात कही। उनका का कहना है कि अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के देश कोई सामान्य बाजार नहीं हैं। वहां के ग्राहकों को डिजाइन में विविधता चाहिए। हर बार कुछ नया और अलग प्रोडक्ट की चाह होती है उन्हें। साथ ही वे क्वालिटी में कहीं भी समझौता नहीं करते। इसलिए सिर्फ यह सोच कर खुश नहीं हो सकते कि अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ की दरें घटा दीं या यूरोपीय यूनियन के देशों के साथ हमारा एफटीए हो गया तो सबकुछ ठीक हो गया। भारतीय निर्यातकों को विदेशी ग्राहकों का विश्वास जीतना होगा। अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर ड्यूटी घटा कर 18 फीसदी करने से भारतीय हस्तशिल्प निर्यातकों को चीन के मुकाबले लाभ मिला है। अभी चीन से आने वाले ऐसे सामानों पर अमेरिका में 35 फीसदी का टैरिफ है।





























