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आयकर का सरलीकरण

by Blitz India Media
February 24, 2025
in Hindi Edition
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दीपक द्विवेदी

नए आयकर विधेयक में जो बदलाव किए गए हैं और कई गैर जरूरी प्रावधानों को हटाया गया है; उसके पीछे नए आयकर कानून को वैश्विक मानकों के अनुकूल बनाने का ही प्रयास समाहित है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नए आयकर अधिनियम 2025 को लोकसभा में पेश कर दिया है। इसे समीक्षा के लिए सदन की प्रवर समिति के पास भेज दिया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि दूसरे बजट सत्र के पहले दिन समिति अपनी रिपोर्ट दे सकती है। उसके बाद संसद विधेयक को पारित करने पर विचार करेगी। यह पहल सराहनीय है कि विधेयक में आयकर कानून को संक्षिप्त, स्पष्ट, पढ़ने और समझने में पहले से और अधिक आसान बनाने का प्रस्ताव है। नए आयकर विधेयक में करीब 2.6 लाख शब्द होंगे जबकि मौजूदा आयकर अधिनियम 1961 में 5.12 लाख शब्द हैं। इसका मतलब है कि गैर जरूरी शब्दों को हटाकर आयकर कानून को सरल बनाया जा रहा है। नया आयकर विधेयक 622 पन्नों का है जबकि मौजूदा आयकर अधिनियम में 1647 पन्ने हैं। नए आयकर विधेयक में जो बदलाव किए गए हैं और जो कई गैर जरूरी प्रावधानों को हटाया गया है; उसके पीछे नए आयकर कानून को वैश्विक मानकों के अनुकूल बनाने का ही प्रयास समाहित है।
आम व्यक्ति आसानी से कानून समझ सके और आयकर की गणना कर सके, इसके लिए तालिकाओं का अधिक संख्या में इस्तेमाल किया गया है। साथ ही एक क्षेत्र और वर्ग से जुड़े प्रावधानों को एक ही जगह पर रखा गया है। 18 तालिकाओं की तुलना में 57 से अधिक तालिकाओं को शामिल किया गया है जिससे कानून से जुड़े प्रावधानों को समझना आसान होगा। उपधाराओं और खंडों का भी इस्तेमाल किया गया है। इसमें कोई दो राय नहीं कि इस विधेयक में टैक्स फाइलिंग से जुड़ी कठिनाइयों को दूर करने के प्रयास दिखाई दे रहे हैं। आम बजट में आयकर रियायत से पहले ही नया आयकर अधिनियम पेश करने की घोषणा हुई थी। नए विधेयक को पुराने अधिनियम से छोटा बनाया गया है और नए अधिनियम में कम शब्दों में कर प्रक्रिया को ढंग से समझाने की कोशिश की गई है।

यह भी एक सराहनीय प्रयास है कि कर कानून को सरल, पारदर्शी और करदाता के अनुकूल बनाया जाना विकसित भारत के लक्ष्यों को पाने के लिए उठाया गया एक अनुकूल कदम है। यह भी अच्छी बात है कि ‘फाइनेंशियल ईयर’, ‘प्रीवियस ईयर’, ‘असेसमेंट ईयर’ जैसे शब्द के लिए अब केवल ‘टैक्स ईयर’ शब्द का इस्तेमाल होगा। नए आयकर विधेयक को अंतिम रूप देने के लिए 150 अफसरों की समिति लगाई गई और आयकर में सरलीकरण को लेकर वित्त मंत्रालय द्वारा गठित समिति को 21 हजार के करीब ऑनलाइन सुझाव मिले थे। बिल को सरल बनाने की दिशा में कुछ अहम प्रावधान भी किए गए हैं जैसे एनजीओ अध्याय को सरल भाषा के प्रयोग से अधिक व्यापक बनाया गया है। तालिकाओं के माध्यम से सरलता और बड़ी संख्या में प्रावधानों को अनुसूचियों में रखा गया है। वेतनभोगी कर्मचारियों से संबंधी सभी प्रावधानों में आसानी के लिए विधेयक में एक ही जगह पर रखा गया है। विशिष्ट आय और व्यक्तियों के लिए छूट से संबंधित प्रावधानों को स्थानांतरित किया गया तथा उन्हें अलग से एक जगह पर उल्लेखित किया गया है। ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण, पेंशन का रूपांतरण, वीआरएस पर मुआवजा और छंटनी मुआवजा जैसे प्रावधान अब वेतन अध्याय का ही हिस्सा बना दिए गए हैं।

यदि यह आयकर अधिनियम इस वर्ष पारित हो जाता है तो वर्ष 2026 से इसे लागू कर दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में वर्ष 2025 आयकर के मामले में एक ऐतिहासिक वर्ष होगा। इस वर्ष 12 लाख रुपये तक की आमदनी को आयकर से छूट मिली है। अब यह मान लिया गया है कि 12 लाख रुपये की कमाई सामान्य बात है और यह भी चिन्हित करता है कि देश एक नई विकास यात्रा की ओर बढ़ चला है। वित्त मंत्री के अनुसार नए आयकर कानून से करदेयता अधिक सरल हो जाएगी और यह आयकर अधिकारियों के साथ आयकरदाताओं को भी राहत प्रदान करेगी। इससे अच्छा और क्या हो सकता है कि आयकरदाताओं को जटिल नियमों में समझ न आने वाली भाषा से छुटकारा मिलेगा। आशा यह की जानी चाहिए कि संसदीय समिति व्यापक विचार-विमर्श के दौरान इस नए आयकर विधेयक को वास्तव में और सरल रूप प्रदान करेगी। हमें यही अपेक्षा करनी चाहिए कि देश में ऐसा वातावरण बने जिससे लोग स्वेच्छा से आयकर देने के लिए प्रेरित हों और उनके मन में किसी तरह का भय न रहे। इसके साथ ही ऐसे भी लोग कर के दायरे में आने चाहिए जिनकी आमदनी एक निश्चित धनराशि से अधिक हो। सरकार को चाहिए कि वह आयकरदाताओं की संख्या बढ़ाने के उपाय करे। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि अभी आयकरदाताओं की संख्या चार करोड़ से भी कम है। इनमें ज्यादातर नौकरीपेशा लोग ही शामिल हैं। ऐसे में उन लोगों की पहचान करना भी आवश्यक है जो वर्तमान आयकरदाताओं से भी बहुत अधिक कमा रहे हैं किंतु आयकर नहीं देते। जैसे कि वे संपन्न किसान और व्यापारी अथवा दुकानदार जो एक सीमा से अधिक आय अर्जित कर रहे हैं लेकिन किसी न किसी कारण से आयकर के दायरे में नहीं हैं। यदि ऐसे लोगों को आयकरदाताओं की श्रेणी में लाया जाता है तो इससे देश का राजस्व बढ़ेगा और भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने तथा वांछित सुविधाओं को मुहैया कराने में मदद भी मिलेगी।

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