ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। इंडियन एयरफोर्स अगले दशक में सुपर एयर पावर बनने वाली है। उसकी झोली में हर साल करीब 40 फाइटर जेट्स डिलिवर किए जाएंगे। एयरफोर्स लंबे समय से कहती रही है कि घटते फाइटर जेट्स की कमी को पूरा करने के लिए उसे हर साल कम से कम 40 जेट चाहिए। ऐसे में अब उसकी यह मुराद पूरी होने जा रही है। चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन देशों से घिरे भारत की एयरफोर्स के अब सुपर एयर पावर बनने की बात महज कागजी दावे नहीं बल्कि आंकड़े कह रहे हैं।
दरअसल, फ्रांस के साथ 114 राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे के साथ एयरफोर्स कई अन्य डील में जुटी है और ये सभी डील्स या तो पूरे हो गए हैं या अगले कुछ सालों में पूरे होने वाले हैं। इससे एयरफोर्स की दशकों पुरानी मांग पूरी होने वाली है। एयरफोर्स कहती है कि उसके स्क्वाड्रन की घटती संख्या को थामने के लिए उसे हर साल कम से कम 40 फाइटर जेट्स चाहिए। यह डिलिवरी अगले कम से कम एक दशक तक लगातार बनी रहनी चाहिए। ऐसे में अब यह तय हो गया है कि एयरफोर्स के अगले दशक में हर साल करीब 40 फाइटर जेट्स मिलेंगे।
ऐसे में इंडियन एयरफोर्स को केवल एक डील पर निर्भर नहीं है। भारत मात्र 114 राफेल खरीद रहा है लेकिन अगले दशक में देश को कम के कम 400 से 500 फाइटर जेट्स की जरूरत है। ऐसे में राफेल मात्र से इसकी भरपाई नहीं हो सकती है।
भारी संख्या में फाइटर जेट्स की जरूरत
दरअसल, भारत के पास इस वक्त केवल 29 एक्टिव फाइटर जेट्स स्क्वाड्रन हैं। जबकि मंजूर क्षमता 42 की है। इतना ही नहीं, चीन की एयरफोर्स की ताकत को देखते हुए यह संख्या बढ़कर 60 स्क्वाड्रन की भी हो सकती है। 60 स्क्वावड्रन का मतलब 1080 फाइटर जेट्स है। एक स्क्वाड्रन में 18 जेट्स होते हैं। मौजूदा वक्त में देश के पास करीब 500 फाइटर जेट्स हैं। इसमें से भी करीब 200 जेट्स अगले दशक में रिटायर हो जाएंगे। मिग, जैगुआर और मिराज-2000 विमान फेज वाइज रिटायर होंगे। ऐसे में एयरफोर्स के बेड़े में मुख्य रूप से केवल सुखोई-30एमकेआई और 36 राफेल विमान बच जाएंगे।

























