ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की टोही, निगरानी और खोज-बचाव क्षमताओं को बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने चार साल की वेट लीज पर चार फिक्स्ड-विंग एम्फीबियस एयरक्राफ्ट लेने के लिए रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन (आरएफआई) जारी किया है।
क्या होती है वेट लीज?
वेट लीज एक खास तरह का समझौता होता है। इसके तहत लीज पर विमान देने वाला न केवल एयरक्राफ्ट देने के लिए, बल्कि पूरे क्रू (फ्लाइट डेक और केबिन), रखरखाव और बीमा की सप्लाई के लिए भी जिम्मेदार होता है। भारतीय नौसेना इस तरह ट्रेनिंग का इंतज़ार किए बिना तुरंत ऑपरेशनल क्षमता कर लेगी।
क्या होते हैं एम्फीबियस एयरक्राफ्ट
एम्फीबियस एयरक्राफ्ट एक ऐसा एयरक्राफ्ट होता है जो जमीन और पानी दोनों पर टेक-ऑफ और लैंड कर सकता है। ये एयरक्राफ्ट आमतौर पर फिक्स्ड-विंग वाले होते हैं। नाव जैसे हल्स वाले सीप्लेन को फ्लाइंग बोट भी कहा जाता है.
क्यों चाहिए एम्फीबियस एयरक्राफ्ट?
भारत की तटरेखा बेहद विशाल है। अंडमान और निकोबार जैसे द्वीप भारत की मुख्य भूमि से काफी दूर हैं। अरब सागर और हिंद महासागर में इंडियन नेवी को समुद्री लुटेरों की चुनौती से भी निपटना पड़ता है। ऐसे में निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर पानी पर भी लैंड करने के लिए एम्फीबियस विमान की जरूरत है।
एम्फीबियस एयरक्राफ्ट का इतिहास
पहले प्रैक्टिकल सीप्लेन 1911 और 1912 में अमेरिका में बनाए गए। 1919 में अमेरिकी नौसेना के सीप्लेन एनसी-4 ने उत्तरी अटलांटिक को पहली बार पार किया। 1920 के दशक के आखिर तक दुनिया के सबसे बड़े और सबसे तेज एयरक्राफ्ट सीप्लेन थे। दूसरे विश्व युद्ध के शुरू होने के बाद ऐसे विमानों का सैन्य महत्व कम हुआ। हालांकि पानी पर आधारित विमानों का विकास जारी रहा और आज भी ये नौसेनिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एम्फीबियस एयरक्राफ्ट के मुख्य काम
एम्फीबियस फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट कई तरह के काम कर सकते हैं। ये इमरजेंसी के दौरान सीधे सैनिकों, मेडिकल टीमों, राहत सामग्री या उपकरणों को पहुंचा सकते हैं। नेवी में इनका मुख्य काम ऑपरेशनल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट, लंबी दूरी की खोज और बचाव, स्पेशल ऑपरेशन, मानवीय सहायता और घायलों को निकालना होगा। एंटी-पायरेसी, एंटी-नारकोटिक्स सपोर्ट और समुद्री गश्त का काम भी इन विमानों से लिया जाएगा।
नेवी के पास कितने फिक्स्ड-विंग एम्फीबियस एयरक्राफ्ट हैं
प्राकृतिक आपदाओं के दौरान एम्फीबियस एयरक्राफ्ट तेजी से मदद पहुंचा सकते हैं। अभी इंडियन नेवी के पास सर्विस में कोई फिक्स्ड-विंग एम्फीबियस एयरक्राफ्ट नहीं है। भारत और जापान पहले शिनमेवा यूएस-2 एयरक्राफ्ट खरीदने पर बात कर रहे थे लेकिन कीमत और दूसरी शर्तों की वजह से यह प्रस्ताव पूरा नहीं हो पाय। अब नेवी तुरंत ऑपरेशनल क्षमता हासिल करने के लिए लीज का ऑप्शन चुन रही है।
































