सिंधु झा
नई दिल्ली। भारत के अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) इकोसिस्टम में काफी तेजी से बदलाव हो रहा है। स्पष्ट नीतिगत दिशा, स्ट्रैजिक फंडिंग और संस्थागत सुधारों के सपोर्ट से विज्ञान और प्रौद्योगिकी में निवेश लगातार बढ़ रहा है। यह भारत की एक आत्मनिर्भर, ज्ञान-संचालित अर्थव्यवस्था बनाने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है जो अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से प्रमुख चुनौतियों का समाधान करती है। भारत सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये की आरडीआई योजना शुरू की है जिससे अनुसंधान को नयी दिशा मिलने की बात कही जा रही है।
भारत ने अनुसंधान एवं विकास पर वर्ष 2010-11 में 60 हजार 196 करोड़ रुपये खर्च किये थे जो 2020-21 में बढ़कर 1.27 लाख करोड़ हो गया। केंद्र सरकार कुल अनुसंधान एवं विकास के खर्च में 43.7 फीसद का योगदान देती है।
जानकारों के मुताबिक सरकार ने ‘विकसित भारत-2047’ की अपनी यात्रा के केंद्र में अनुसंधान एवं विकास को रखा है। सरकार मानती है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी स्वास्थ्य, ऊर्जा, डिजिटल परिवर्तन और विनिर्माण में प्रगति को गति प्रदान करते हैं। सार्वजनिक और निजी भागीदारी को बढ़ाने, शिक्षा जगत और उद्योग के बीच संबंधों को मजबूत करने और उभरती प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के प्रयासों ने एक गतिशील नवाचार इकोसिस्टम तैयार किया है। जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ रहा है, अनुसंधान और नवाचार सतत और समावेशी विकास प्राप्त करने के लिए केंद्रीय भूमिका निभाते रहेंगे। पिछले एक दशक में अनुसंधान और नवाचार के प्रति भारत की प्रतिबद्धता लगातार मज़बूत हुई है।






























