ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। सपना अगर कुछ बड़ा करने का है तो मेहनत के साथ-साथ सही दिशा में प्रयास करना जरूरी है। हरियाणा की बेटी ने भी कुछ ऐसा किया था। एसडीएम बनने की जिद के कारण उन्होंने पीएचडी छोड़ दी थी। 8 से 10 घंटे की पढ़ाई करके उन्होंने वो हासिल किया, जिसका सपना लाखों लोग देखते हैं। यूपीपीसीएस परीक्षा में टाॅप रैंक में शामिल होकर उन्होंने अपना लक्ष्य पूरा किया था।
उनकी मेहनत रंग लाई और शानदार रैंक-2 हासिल की थी। अब वह एसडीएम के तौर पर काम कर रही हैं, और उन्होंने अपनी लगातार कोशिशों से बड़ी सफलता हासिल की है।
पहली बार मिली थी असफलता
संगीता ने अपनी यूपीपीएससी की तैयारी में शुरुआत 5 से 6 घंटे पढ़ाई से की थी। हालांकि, बाद में वह 8 से 10 घंटे पढ़ाई करने लगीं। उन्होंने यूपीपीएससी की परीक्षा दी थी लेकिन उन्हें इसमें असफलता मिली। इसके बाद उन्होंने अपनी तैयारी और तेज कर दी और आगे बढ़ती रहीं।
संगीता सिविल सर्विस में जाना चाहती थीं। एसडीएम बनने की जिद और जुनून की वजह से उन्होंने 1 साल बाद ही पीएचडी छोड़ दी थी यूपीपीसीएस एग्जाम की तैयारी भी कर रही थीं।
उन्होंने साउथ एशियन इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर वर्ल्ड बैंक के एक प्रोजेक्ट पर काम किया था। उन्हें पढ़ाई के लिए स्काॅलरशिप भी मिलीं और इस वजह से वह हायर स्टडीज में काफी मदद मिली।
इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से की मास्टर्स डिग्री
संगीता ने बैचलर्स की पढ़ाई गुरुग्राम में ही पूरी की थी। हालांकि, मास्टर डिग्री के लिए वह दिल्ली की इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी पहुंची थीं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पीएचडी प्रोग्राम में एडमिशन लिया था।
गुरुग्राम की निवासी, पिता नेवी से रिटायर्ड
संगीता मूलरूप से हरियाणा के गुरुग्राम के शांति नगर की निवासी हैं। वह एक अच्छे बैकग्राउंड वाले परिवार से संबंधित हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई यही से पूरी की थी। संगीता के पिता इंडियन नेवी से रिटार्ड ऑफिसर हैं और उनकी माता गृहिणी है।





























