ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। अमेरिका से ट्रेड डील में एक बड़ी शर्त यह है कि भारत रूस से तेल आयात बंद करेगा। इसके एवज में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ को घटाकर सीधे 18 फीसदी कर दिया है। भले ही यह डील हो गई हो, मगर भारत की ऐसी कई कंपनियां हैं, जिन्होंने जनवरी-फरवरी में ही रूसी तेल को लेकर डील की थी, उनकी डिलिवरी मार्च तक ही संभव हो पाएगी।
ऐसे में अगर भारत, रूस के तेल पर पूरी तरह पाबंदी लगा भी दे तो अभी कुछ समय तक रूस का तेल भारत आता रहेगा। वहीं, अमेरिका और वेनेजुएला से भारत कच्चे तेल का आयात कर सकेगा। यानी फिलहाल, भारत के दोनों हाथों में अभी लड्डू है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आने वाले दिनों में डीजल-पेट्रोल क्या सस्ता होगा?
क्या कुछ कंपनियों के पास
रूसी तेल का विकल्प नहीं
मीडिया की एक खबर के अनुसार, भारत अमेरिका के साथ समझौते के बाद से रूस से तेल खरीदना बंद करेगा, ताकि उसकी वस्तुओं पर टैरिफ कम लगे। हालांकि, नायरा एनर्जी रूस से तेल लेना जारी रखेगी, क्योंकि उसके पास अभी और कोई विकल्प नहीं है। वह ऐसे देशों से रूसी तेल खरीद सकती हैं, जिन पर ये पाबंदी नहीं है। इसी तरह रूसी तेल को लेकर जो डील जनवरी-फरवरी में ही हो गई थी, उसकी आपूर्ति मार्च तक हो पाएगी। यानी पहले की गई खरीद के मुताबिक, रूस से तेल की ढुलाई होती रहेगी।
भारत का 2025 में क्रूड ऑयल का आयात
रूस भारी छूट पर भारत को कच्चा तेल देता रहा है। भारतीय रिफाइनरी कंपनियां रूसी तेल की दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी खरीदार हैं। दरअसल, 2022 में यूक्रेन से युद्ध छिड़ने के बाद रूस ने बेहद कम रेट पर कच्चा तेल देना शुरू किया। भारत ने भी इस डिस्काउंटेड ऑयल का जमकर फायदा उठाया। फिलहाल इंडियन रिफाइनर्स की ओर से जो ऑर्डर पहले दिए जा चुके हैं, उन्हें नहीं रोका जाएगा। वहीं, अब अमेरिका से ट्रेड डील के बाद से रूसी तेल को लेकर नए ऑर्डर नहीं दिए जाएंगे।
इन कंपनियों ने रूस से तेल खरीदना बंद किया
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि., मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लि. ने बीते साल ही रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया था। यह कदम तब उठाया गया, जब अमेरिका ने बीते साल रूस से तेल खरीदने वालों पर पाबंदी लगा दी थी। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड को ट्रांजिशन पीरियड मिला था, ताकि पहले से खरीदे रूसी तेल की डिलिवरी पूरी कर सकें। कई निजी कंपनियों ने भी रूसी तेल लेना बंद कर दिया था।
गत वर्ष 180 बिलियन डॉलर का तेल खरीदा
2025 में भारत ने 180 बिलियन डॉलर का तेल आयात किया। इसमें 30-35 फीसदी तेल रूस से आया। बाकी 20-30 फीसदी इराक, 15 फीसदी सऊदी अरब, 10 फीसदी यूएई और 5-10 फीसदी अमेरिका से तेल आया।
रूस से तेल आयात में होगी और गिरावट
अमेरिकी पाबंदी के बाद से रूस से तेल आयात में काफी गिरावट आई। दिसंबर, 2025 में औसतन 2.1-2.2 मिलियन बैरल से गिरकर यह आयात 1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन पर आ गया। जनवरी, 2026 में यह और गिरकर 1 मिलियन बैरल पर आ गया। फरवरी में इसके इतना ही और गिरने की उम्मीद है।
रूस से तेल आयात पर पूरी तरह रोक नहीं
केप्लर कंपनी में रिफाइनिंग और मॉडलिंग में रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोलिया के अनुसार, भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा से भारत के रूसी कच्चे तेल के इंपोर्ट में जल्द ही कमी आने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा-अगले 8-10 हफ्तों के लिए रूसी वॉल्यूम काफी हद तक तय हैं और ब्रेंट की तुलना में यूराल पर भारी छूट के कारण भारत के कॉम्प्लेक्स रिफाइनिंग सिस्टम के लिए आर्थिक रूप से बहुत जरूरी बने हुए हैं।
पहली और दूसरी तिमाही की शुरुआत तक इंपोर्ट 1.1-1.3 मिलियन बैरल प्रति दिन की रेंज में मोटे तौर पर स्थिर रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा-हाल ही में खरीदारी में कुछ कमी के बावजूद भारत के जल्द ही पूरी तरह से अलग होने की संभावना नहीं है।
वेनेजुएला का भारी तेल मंगा सकता है भारत
वहीं, आईसीआरए के प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि यूएस-इंडिया ट्रेड डील में कथित तौर पर भारत अमेरिका से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाएगा और शायद वेनेजुएला से भी तेल खरीदना शुरू कर देगा। भारतीय रिफाइनिंग सेक्टर के लिए, यूएस सहित कच्चे तेल खरीदने के कई रास्ते हैं, क्योंकि 2023 से पहले भारतीय कच्चे तेल के आयात में रूसी कच्चे तेल का हिस्सा 2 प्रतिशत से भी कम था। आईसीआरए का अनुमान है कि रूसी कच्चे तेल को मार्केट कीमत वाले कच्चे तेल से बदलने पर देश के आयात बिल में 2 प्रतिशत से भी कम की बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा, वेनेजुएला का कच्चा तेल भारी होता है और इसलिए सस्ता होता है और यह भारतीय रिफाइनरों के लिए फायदेमंद होगा, जिनमें से कई इस तरह के कच्चे तेल को प्रोसेस कर सकते हैं।
भारत में डीजल-पेट्रोल सस्ता या महंगा होगा
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक भारत को रूस से सस्ता तेल मिल रहा था, जिससे उसे वैश्विक अस्थिरता के बाद भी अपने यहां पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखने में बड़ी मदद मिली। वहीं, अब भारत को अमेरिका से तेल खरीदने पर तो उसे वैश्विक कीमतों पर ही तेल मिलेगा, जबकि वेनेजुएला का भारी तेल सस्ती दरों पर मिल सकता है। ऐसे में अनुमान है कि रूसी तेल से दूरी बनाने पर भारत के आयात बिल पर सालाना 9 से 12 बिलियन डॉलर का बोझ पड़ेगा। ऐसे में भारत में भी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। वहीं, अगर सरकार बफर स्ट्रैटेजी अपनाती है तो कीमतों में इजाफा नहीं होगा। यह तरीका है एक्साइज ड्यूटी में कमी। भारत अपने टैक्स में कटौती कर आयात लागत को कम कर सकता है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतें जस की तस बनी रह सकती हैं।
































