संजय द्विवेदी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के खिलाफ सबसे बड़ा कदम उठाते हुए 15,000 क्षमता वाला मेगा डिटेंशन सेंटर बनाने की योजना तैयार कर ली है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक मंडलायुक्त ने इस डिटेंशन सेंटर का पूरा डेमो मॉडल तैयार कर गृह विभाग को भेजा है। सूत्रों के मुताबिक जांच पूरी होने के बाद जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। प्रस्तावित डिटेंशन सेंटर का मॉडल इतना बड़ा है कि एक साथ करीब 15,000 घुसपैठियों को रखा जा सकेगा। ऐसा कहा जा रहा है कि अगर किसी जिले या मंडल में घुसपैठियों की संख्या इससे ज्यादा हुई तो एक से अधिक डिटेंशन सेंटर भी बनाए जा सकते हैं।
कड़ी सुरक्षा संग अत्याधुनिक सुविधाएं
यह डिटेंशन सेंटर कई अत्याधुनिक सुविधाओं और कड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं से लैस होगा। जैसे बायोमेट्रिक सिस्टम, फेस रिकॉग्निशन और थंब इम्प्रेशन, 24×7 सीसीटीवी मॉनिटरिंग, त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, हाई-टेक कंट्रोल रूम से एंट्री की अनुमति, कम से कम 50 केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती, सीमित और पूरी तरह नियंत्रित एंट्री पॉइंट तथा केवल अधिकृत अधिकारियों को ही इसमें प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। महिला और पुरुष डिटेंशन सेंटर एक ही परिसर में होंगे पर उनकी निगरानी और सुरक्षा पूरी तरह अलग-अलग रहेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले महीने सभी 17 नगर निगमों को निर्देश दिया था कि वे अपने-अपने क्षेत्र में रह रहे अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों को चिन्हित करें। लखनऊ में मेयर सुषमा खर्कवाल ने खुद गुडंबा क्षेत्र की बस्ती में जाकर सर्वे किया था जहां सैकड़ों अवैध घुसपैठिए मिले थे। अब चिन्हित लोगों को पहले डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा और बाद में विधि-विधान से देश से बाहर किया जाएगा।
सरकार का दावा है कि यह डिटेंशन सेंटर देश का सबसे बड़ा और सबसे सुरक्षित होगा जिससे अवैध घुसपैठ की समस्या पर पूरी तरह लगाम लग सकेगी।
जिले-जिले में बनीं टीमें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद यूपी के सभी जिलों में रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के साथ अवैध प्रवासियों की तलाश हो रही है। इनकी तलाश के लिए टीमों को गठन भी किया गया है। पश्चिमी यूपी में इसे लेकर खास तेजी है। सत्यापन सेल को लगाया गया है। मेरठ में 250 पुलिसकर्मियों की टीम और पीएसी के साथ दोबारा से बड़ा सत्यापन अभियान चलाया गया और ड्रोन से निगरानी की गई। करीब 500 लोगों का रिकॉर्ड खंगाला गया है और उनके दस्तावेज लिए गए हैं। आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके बांग्लादेशी और म्यांमार से आए रोहिंग्या घुसपैठियों को चिह्नित करने के लिए यूपी सरकार के आदेश के बाद काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
आगरा में अभियान
आगरा कमिश्नरेट पुलिस भी हरकत में आ गई है। पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि करीब 27 बांग्लादेशी जेल में सजा काट रहे हैं। उन्हें पूर्व में पकड़ा गया था। अगले महीने सभी की सजा पूरी हो रही है। जेल से बाहर आते ही पुलिस उन्हें अपनी अभिरक्षा में लेगी। सभी को वापस भेजा जाएगा।
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