आस्था भट्टाचार्य
नई दिल्ली। भारत जल्द ही अंतरिक्ष में अपनी ताकत को और बढ़ाने जा रहा है जिसके बाद आसमान से दुश्मनों की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जाएगी। मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इसरो यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन एक नया और बेहद एडवांस सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसका नाम ‘अन्वेषा’ रखा गया है। यह सैटेलाइट पीएसएलवी-सी62 रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। आपको बता दें, ‘अन्वेषा’ एक खास हाइपरस्पेक्ट्रल आई से लैस है, जो न सिर्फ दुश्मन के ठिकानों पर बारीक नजर रखेगी, बल्कि जमीन के नीचे दबे खनिजों और पानी का भी पता लगा सकती है। ऐसे में, यह लॉन्च भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगा।
‘अन्वेषा’ सैटेलाइट भारत के लिए एक गेम चेंजर साबित होने वाला है जिसे डीआरडीओ द्वारा डेवलप किया गया है। यह केवल तस्वीरें लेने वाला सैटेलाइट नहीं है, बल्कि यह हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल करता है। आसान भाषा में कहें तो, यह सैटेलाइट किसी भी चीज को सैकड़ों अलग-अलग रंगों या स्पेक्ट्रल बैंड्स में देख सकता है। जहां एक आम सैटेलाइट सिर्फ लाल, हरा और नीला रंग देखता है, वहीं ‘अन्वेषा’ हर चीज को उसके असली रासायनिक तत्वों के हिसाब से पहचान सकता है। यह क्षमता इसे डिफेंस के लिए बहुत खास बनाती है।
उदाहरण के लिए, यह सैटेलाइट छिपकर रखे गए हथियारों, जमीन के नीचे दबे मिनरल्स या किसी फसल में होने वाली बीमारी को भी तुरंत पहचान सकता है। इस सैटेलाइट का लॉन्च यह दिखाता है कि भारत अब रिमोट सेंसिंग टेक्नोलॉजी में विश्वस्तरीय ताकत बन चुका है। आपको बता दें, इस सैटेलाइन का कुल वजन 600 किलोग्राम होगा। इसी से इसकी ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
क्या है ‘हाइपरस्पेक्ट्रल आई’
‘अन्वेषा’ का मुख्य हथियार उसकी हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग क्षमता है। यह तकनीक किसी भी चीज से टकराकर वापस आने वाले प्रकाश को कई सौ छोटे-छोटे ‘स्पेक्ट्रल बैंड्स’ में बांट देती है। हर पदार्थ जैसे सोना, पानी, या प्लास्टिक प्रकाश को एक अलग तरीके से वापस भेजता है। इस बारीक पहचान की वजह से ‘अन्वेषा’ छिपे हुए आतंकवादियों के कैंप, जमीन में दबे हुए तेल या गैस के भंडार, और यहां तक कि समंदर के पानी के अंदर की बनावट को भी साफ-साफ बता सकता है। सेना के लिए यह बहुत ही काम का टूल है। यह दुश्मन के कैमोफ्लेज नेट को भेदकर उनके ठिकानों, मिसाइलों की पोजिशन, और हथियारों के जमावड़े का पता लगा सकता है।
‘अन्वेषा’ कैसे करेगा दो बड़े काम?
इस सैटेलाइट की क्षमता केवल जासूसी तक ही सीमित नहीं है। इसके कई बड़े नागरिक इस्तेमाल भी हैं। यह सैटेलाइट बॉर्डर की निगरानी करेगा, दुश्मनों की गतिविधियों पर नजर रखेगा और रणनीतिक जानकारी देगा। यह भारत की सेनाओं के लिए एक बेहतरीन जासूसी प्लेटफार्म है।
यह जमीन के नीचे दबे हुए खनिजों जैसे सोना, लोहा, और तेल के भंडारों को ढूंढने में मदद करेगा। इससे देश को प्राकृतिक संसाधनों की खोज में बहुत बड़ी मदद मिलेगी। यह पता लगा सकता है कि किस खेत में कौन सी फसल बीमार पड़ रही है, किस फसल को कितना पानी चाहिए, और कहां सूखा पड़ने वाला है। इससे किसान और सरकार दोनों को फायदा होगा।
क्यों है जरूरी?
‘अन्वेषा’ को इसरो के सबसे भरोसेमंद रॉकेट पीएसएलवी यानी पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल के सी 62 मिशन से लॉन्च किया जाएगा। पीएसएलवी को इसरो का ‘वर्कहॉर्स’ कहा जाता है, क्योंकि यह बहुत कम लागत में और लगातार सफल लॉन्च करता रहा है। पीएसएलवी-सी62 मिशन इस बात की गारंटी है कि ‘अन्वेषा’ सही और सटीक कक्षा में स्थापित होगा, ताकि वह अपना काम बिना किसी रुकावट के शुरू कर सके। यह लॉन्च पूरी तरह से भारत की अपनी तकनीक, अपने रॉकेट और अपने वैज्ञानिकों की मेहनत का नतीजा है।
भविष्य की तैयारियों का सबूत
‘अन्वेषा’ का सफल प्रक्षेपण भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगा, जिनके पास यह एडवांस हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग तकनीक है. यह भारत को अंतरिक्ष आधारित जानकारी में एक बड़ी शक्ति बनाएगा। यह मिसाइल वॉर्निंग सिस्टम और आपदा प्रबंधन के लिए भी बहुत काम का साबित होगा। कुल मिलाकर, अन्वेषा भारत के आसमान में एक ऐसी ‘खुफिया आंख’ बनने जा रहा है, जो देश की सुरक्षा और समृद्धि दोनों को सुनिश्चित करेगी।
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