ब्लिट्ज ब्यूरो
जयपुर। राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों की खस्ताहाल वित्तीय स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए बड़े बदलावों का खाका तैयार किया है। कुलपतियों के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद जारी निर्देशों में राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि बिना कड़े सुधारों के विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता और वित्तीय स्थिरता बचाना मुश्किल है।
राज्यपाल ने इस बात पर हैरानी जताई कि कई विश्वविद्यालयों में पिछले 10 से 12 वर्षों से ट्यूशन फीस में कोई संशोधन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि समय के साथ फीस न बढ़ाना संस्थानों को अंदर से खोखला कर रहा है। हालांकि, उन्होंने छात्रों के हितों का ध्यान रखते हुए चेतावनी भी दी कि फीस वृद्धि अचानक न हो, ताकि विरोध की स्थिति न बने। कोई भी बदलाव प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही घोषित कर दिया जाए।
सरकारी कर्ज पर ‘भारी ब्याज’ की विसंगति
राज्यपाल ने राज्य सरकार की नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि सरकार विश्वविद्यालयों को 10% से 12% ब्याज पर कर्ज देती है, जबकि बैंक 8% पर ही ऋण दे रहे हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि अपने ही संस्थानों से इतना ऊंचा ब्याज लेना अनुचित है और इसमें तुरंत राहत दी जाए।
भ्रष्टाचार पर लगाम और ऑडिट की सख्ती
हाल के दिनों में कुलपतियों के निलंबन और भ्रष्टाचार के मामलों को देखते हुए राज्यपाल ने सीएजी की ओर से ऑडिट अनिवार्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हर कुलपति को अपने तीसरे वर्ष के कार्यकाल में अनिवार्य ऑडिट कराना होगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
पेंशन और पाठ्यक्रम पर विशेष जोर
राज्यपाल ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से पेंशन भुगतान के मुद्दे पर चर्चा की और एक समर्पित समिति बनाने का प्रस्ताव दिया। साथ ही, उन्होंने पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान प्रणाली को बढ़ावा देने की वकालत करते हुए ऋषि पराशर और वल्लभाचार्य के ग्रंथों को शामिल करने का सुझाव दिया। राज्यपाल ने साफ कहा कि खाली पदों पर भर्ती में देरी शैक्षणिक गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ है, जिसे तुरंत दूर किया जाना चाहिए।
































