ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच एक लंबे समय से प्रतीक्षित ट्रेड डील को फाइनल कर दिया गया है। इससे भारतीय एक्सपोर्ट सेक्टर और फाइनेंशियल मार्केट में उम्मीद की लहर दौड़ चुकी है। इस समझौते के तहत भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है। इससे अमेरिकी बाजार में भारत की कॉम्पिटिटिवनेस में जबरदस्त सुधार देखने को मिला है। वैसे तो यह डील भारत के लिए एक बड़ी जीत है लेकिन यह ग्लोबल ट्रेड के समीकरणों को भी बदल देती है। आइए जानते हैं कि इस डील से किन देशों को नुकसान हो सकता है।
चीन को होगा नुकसान
ऐसी उम्मीद है कि चीन को सबसे ज्यादा नुकसान होने वाला है। दरअसल अमेरिका चीनी सामानों पर 34% से 37% का ऊंचा टैरिफ लगाता है। यह एक ऐसी पॉलिसी है जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पूरा समर्थन मिला हुआ है। अब जब भारतीय एक्सपोर्ट पर सिर्फ 18% टैरिफ लगेगा तो इलेक्ट्रॉनिक, ऑटो कॉम्पोनेंट्स, केमिकल्स और मशीनरी जैसे सेक्टर में चीनी प्रॉडक्ट अपनी कीमत की कॉम्पिटिटिवनेस को खो देंगे। इससे अमेरिकी सप्लाई चेन चीन से हटकर भारत की तरफ तेजी से बढ़ सकती है।
बांग्लादेश को लगेगा झटका
बांग्लादेश को टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर में गंभीर दबाव महसूस होने की संभावना है। बांग्लादेशी गारमेंट्स पर फिलहाल अमेरिका में 20% टैरिफ लगता है। यह भारत के नए 18 प्रतिशत से ज्यादा है। कीमत के प्रति संवेदनशील फैशन सप्लाई चैन में टैरिफ का छोटा सा अंतर भी मायने रखता है। इसी के साथ अमेरिकी रिटेलर बांग्लादेश से आर्डर भारत की ओर ज्यादा भेज सकते हैं।
वियतनाम भी खो सकता है अपनी जगह
वियतनाम बीते कुछ सालों में अमेरिकी इंपॉर्टेंस के लिए चीन के एक मजबूत विकल्प के तौर पर उभरा है। हालांकि वियतनामी एक्सपोर्ट पर लगभग 20% टैरिफ लगने की वजह से भारत अमेरिका डील वियतनाम को नुकसान में डालती है। इलेक्ट्रॉनिक, फुटवियर और फर्नीचर जैसे सामानों में डिमांड कम हो सकती है।
पाकिस्तान को आर्थिक नुकसान
पाकिस्तान को अमेरिका में अपने एक्सपोर्ट पर लगभग 19% टैरिफ का सामना करना पड़ता है. यह भारत से थोड़ा ज्यादा है। हालांकि यह अंतर छोटा लगता है लेकिन यह भारत को क्षेत्रीय स्तर पर एक साफ बढ़त देता है। टेक्सटाइल, कृषि प्रोडक्ट और हल्के इंजीनियरिंग सामानों में यह बढ़त अच्छी खासी है।
दक्षिण पूर्व एशियाई देश दबाव में
थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया और कंबोडिया जैसे कई दक्षिण पूर्व एशियाई देशों को 19% से 20% के बीच टैरिफ का सामना करना पड़ता है। इससे उनके इंजीनियरिंग सामान, सीफूड, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के लिए भारतीय एक्सपोर्ट के साथ मुकाबला करना मुश्किल हो जाता है।
रूस पर भी पड़ेगा प्रभाव
इस डील का असर सिर्फ मैन्युफैक्चर्ड सामान तक ही सीमित नहीं है। बड़ी रणनीतिक साझेदारी के तहत भारत ने रूस से तेल इंपोर्ट कम करने और अमेरिका से एनर्जी खरीद बढ़ाने पर सहमति जताई है। इस कदम से रूस को नुकसान होने की संभावना है। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे उसका तेल एक्सपोर्ट मार्केट सिकुड़ेगा और वैश्विक आर्थिक दबाव के समय एक बड़ा रेवेन्यू सोर्स कम हो जाएगा।
































