राजेश दुबे
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने क्रिकेट और अन्य खेल संघों के संचालन पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि खेल संस्थाओं का नेतृत्व ऐसे लोगों के हाथ में होना चाहिए, जो खेल को समझते हों। क्रिकेट संघों में रिटायर्ड क्रिकेटरों को जगह मिलनी चाहिए, न कि ऐसे लोगों को जो बैट तक पकड़ना नहीं जानते।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीए) के चुनाव पर रोक लगाई गई थी। ये चुनाव 6 जनवरी को होने थे, लेकिन उनमें भाई-भतीजावाद और पक्षपात के आरोप लगे थे।
एमसीए में अचानक से सदस्य बढ़े
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने एमसीए की सदस्यता में अचानक हुई बढ़ोतरी पर सवाल उठाया। कोर्ट ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि 1986 से 2023 तक एसोसिएशन में 164 सदस्य थे, लेकिन इसके बाद अचानक बड़ी संख्या में नए सदस्य जोड़ दिए गए। सीजेआई ने पूछा कि इतने सालों में सीमित सदस्य और फिर अचानक ‘बंपर ड्रॉ’ कैसे हो गया।
एमसीए और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली समिति ने प्रक्रिया देखी थी और कुछ आवेदनों को खारिज भी किया गया। साथ ही आरोप लगाया गया कि चैरिटी कमिश्नर ने बिना कैबिनेट से सलाह लिए प्रशासक नियुक्त कर दिया।
सीजेआई ने कहा कि अगर सदस्य संख्या 300 तक बढ़ानी थी तो उसमें नामी और रिटायर्ड अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को शामिल किया जाना चाहिए था।
कोर्ट ने साफ कहा कि खेल खिलाड़ियों की वजह से हैं, प्रशासकों की वजह से नहीं। क्रिकेट क्रिकेटरों से जाना जाता है, उसी तरह हर खेल उसके खिलाड़ियों से।
केदार जाधव ने आरोप लगाया था
मामला तब शुरू हुआ जब पूर्व भारतीय क्रिकेटर और भाजपा नेता केदार जाधव ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 401 नए सदस्यों को जोड़कर वोटर लिस्ट में हेरफेर की गई। याचिका में कहा गया कि इनमें से कई लोग एनसीपी-एसपी विधायक रोहित पवार के रिश्तेदार या कारोबारी सहयोगी हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अपनी याचिकाएं वापस लेने की अनुमति दी और सभी आपत्तियां बॉम्बे हाईकोर्ट के सामने रखने को कहा। कोर्ट ने हाईकोर्ट से मामले का जल्द फैसला करने का अनुरोध किया। केदार जाधव ने भारत के लिए 73 वनडे खेले हैं, जिसमें उन्होंने 1389 रन बनाए हैं।
– बैट पकड़ना न जानने वालों के हाथ में खेल
– एमसीए चुनाव पर रोक से इनकार किया
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