रिलायंस समूह के सर्वेसर्वा मुकेश अंबानी ने जामनगर में 3000 एकड़ में दुनिया भर के बेसहारा, सर्कस से बचाए गए जीवों के लिए आश्रय ‘वनतारा’ बनाया है। इसके लिए 4000 एकड़ में अलग से फलदार पेड़ों का बगीचा लगाया है, उसके पीछे की सच्चाई बहुत कम लोगों को पता होगी।
आपको बता दें कि मुकेश अंबानी के पुत्र अनंत अंबानी के वन्यजीवों से अगाध प्रेम के चलते ‘वनतारा’ की नींव रखी गई। मुकेश अंबानी ने वन्यजीवों को आश्रय देने व उनका जीवन बचाने के लिए अनंत के मिशन को साकार रूप देने में जरा भी देरी नहीं की। संसाधनों की प्रचुर उपलब्धता को मुकेश अंबानी ने एक बेहद सकारात्मक दिशा में मोड़ते हुए दुनिया के लिए मिसाल कायम की।
अनंत अंबानी को बचपन से ही वन्यजीवों के साथ खेलना बहुत पसंद है। बचपन में उन्होंने कुछ कुत्ते पाले थे और कुछ हिरण भ्ाी थे, जिनके के साथ्ा वह खेलते थे। उनके साथ प्रेम का ही यह प्रमाण था कि एक प्रिय कुत्ते स्पार्कल की मृत्यु हुई तब उसकी याद में रिलायंस टाउनशिप के अंदर स्पार्कल की मूर्ति लगाई गई।
फिर एक दिन अनंत अंबानी जब स्लोवाकिया थे वहां उन्होंने यह देखा कि एक सर्कस में कुछ हाथी और बाघ जो एकदम बुजुर्ग हो चुके हैं, उन्हें जहर का इंजेक्शन देकर मारने का आदेश दिया गया है क्योंकि स्लोवाकिया की सरकार ने भी उनके पालन पोषण से मना कर दिया था। उसके बाद से अनंत अंबानी ने अपने पिता से बात की और ‘वनतारा’ प्रोजेक्ट का आइडिया दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने तत्परता दिखाते हुए प्रोजेक्ट ‘वनतारा’ चालू भी करवा दिया। उसके बाद स्लोवाकिया सरकार से बात करके उन सभी जानवरों को जामनगर लाया गया। इस तरह मुकेश अंबानी ने अपने पुत्र के वन्यजीव प्रेम का साकार करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च करने में जरा भी कंजूसी नहीं दिखाई।
विशाल हॉस्पिटल, दुनिया भर
के जानवरों के विशेषज्ञ
विशाल हॉस्पिटल बनाया गया जहां दुनिया भर के जानवरों के विशेषज्ञों की टीम तैनात रहती है। इसमें 400 से ज्यादा विदेशी विशेषज्ञ हैं। जानवरों के अस्पताल में हर तरह के मेडिकल उपकरण मौजूद हैं यहां तक कि जेनेटिक और जींस के विशेषज्ञ भी रखे गए है। यहां जानवरों के लिए आईवीएफ सुविधा भी मौजूद है !
पशुओं को लाने के लिए चार विशेष विमान
वनतारा’ के सामने एयरपोर्ट पर खड़े रहते हैं। इन विमानों को इस चार विशेष विमान ‘वनतारा’ के सामने एयरपोर्ट पर खड़े रहते हैं। इन विमानों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि दुनिया भर से कहीं भी जानवरों को लाया जा सके जैसे कोविड लॉकडाउन में बहरीन में एक शेख ने अपने 1000 से ज्यादा जिराफ, शेर, बाघ इत्यादि को खाना खिलाने में असमर्थता जाहिर कर दी थी और यह लगा कि ये जानवर भूख से तड़प कर मर जाएंगे।
तब तुरंत विशेष विमान भेज कर उन सभी जानवरों को ‘वनतारा’ में लाया गया। अनन्त अंबानी ने जब कराची चिड़ियाघर में भूख से मर रहे कई जानवरों के बारे में जाना तब उन्होंने पाकिस्तान सरकार को भी चिट्ठी लिखी थी कि आप इन जानवरों को हमें दे दीजिए हम उनके देखभाल करेंगे।
वनतारा’ के सामने आशियाना
आकाश अंबानी और उनकी पत्नी ज्यादातर समय यहीं ‘वनतारा’ के सामने बने बंगले में रहते हैं। दोनों जानवरों पर अपना पूरा ध्यान लगाते हैं। इनके कई जेट यहां खड़े रहते हैं, जब इन्हें मुंबई जाने का मन करता है, मुंबई चले जाते हैं।
अनंत अंबानी और ‘वनतारा’ प्रोजेक्ट की यह कहानी एक पिता के अपने बेटे के प्रति असीम प्रेम और समर्पण को दर्शाती है। माना कि यह एक महंगा प्रोजेक्ट है, पर साथ ही संवेदनशीलता, करुणा और इंसानियत की मिसाल भी तो है। कुछ लोग अपनी संपत्ति का इस्तेमाल केवल खुद के लिए करते हैं, वहीं अंबानी परिवार ने इसे उन बेबस और बेसहारा जानवरों की सेवा में लगा दिया, जिनका कोई सहारा नहीं था।
हजारों जानवरों को मिली नई जिंदगी
अनंत अंबानी के लिए यह सिर्फ एक शौक नहीं बल्कि उनकी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गया, जिससे हजारों जानवरों को एक नई जिंदगी मिली।
‘वनतारा’ सिर्फ भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में पशु संरक्षण के लिए एक उदाहरण बन चुका है। यह दिखाता है कि जब संसाधन और दृढ़ निश्चय मिलते हैं, तो असंभव को भी संभव किया जा सकता है।
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