ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।भारत अपने नागरिक उड्डयन क्षेत्र को तेजी से बढ़ाना चाहता है ताकि छोटे शहरों के लोग भी सस्ते में हवाई सफर कर सकें। इसी सपने को साकार करने के लिए रूस ने भारत को अपने एसजे-100 क्षेत्रीय विमान को भारत में ही बनाने का प्रस्ताव दिया है लेकिन भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस विमान का इंजन है। रूस का अपना इंजन अभी पूरी तरह परीक्षणों के दौर से गुजर रहा है, जबकि भारत एक ऐसा इंजन चाहता है जो भरोसेमंद हो और जिसकी मरम्मत दुनिया में कहीं भी आसानी से हो सके। इसीलिए भारत अब फ्रांस की कंपनियों से बात कर रहा है ताकि रूसी विमान के ढांचे में फ्रांस का इंजन लगाया जा सके। अगर यह तालमेल बैठ जाता है, तो भारत न केवल अपने लिए विमान बनाएगा, बल्कि दुनिया भर को इनका निर्यात भी कर सकेगा। ऐसे में जानना बेहद दिलचस्प हो जाता है कि इंजन का चुनाव इस पूरी डील के लिए क्यों रूरी है।
क्यों हो रही है फ्रांस की चर्चा?
रूस के पास विमान का बेहतरीन ढांचा है, लेकिन इंजन के मामले में फ्रांस दुनिया का उस्ताद माना जाता है। फ्रांस की कंपनियां जैसे सफरान जो इंजन बनाती हैं, वे पूरी दुनिया में अपनी लंबी उम्र और कम खर्चे के लिए जानी जाती हैं. वहीं, रूसी इंजन के कलपुर्जे मिलने में अक्सर दिक्कत होती है, लेकिन फ्रांस के इंजनों की सर्विसिंग के लिए भारत में ही बड़े हब बनाए जा सकते हैं। इतना ही नहीं, रूस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की वजह से भी भारत चाहता है कि विमान के मुख्य हिस्से जैसे इंजन ऐसे देश से आएं जिससे भविष्य में कोई सप्लाई की समस्या न हो। छोटे शहरों के लिए यह विमान उन रूटों के लिए बनाया गया है जहां यात्रियों की संख्या 70 से 100 के बीच होती है।
































