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भारत के साथ एफटीए, ईयू ने खोल दिए पांच ‘दरवाजे’

by Blitz India Media
February 2, 2026
in Hindi Edition
0
With the FTA with India, the EU has opened five 'doors'
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हाल ही में मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) हो गया है। 27 यूरोपीय देशों ने भारत के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। इस मामले में यूरोपीय यूनियन ने भारत को 5 उपहार दिए हैं जिनके लागू होने से भारतीय इंडस्ट्री की यूरोप में प्रवेश की राह आसान हो जाएगी। यूरोपीय यूनियन से भारत को ये 5 उपहार मिले हैं।
पहला वादा : सीबीएएम पर भारत को भी छूट
मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) जैसा दर्जा है, जिसके तहत भारत को यूरोपीय संघ से यह आश्वासन मिला है कि यदि भविष्य में किसी अन्य देश को सीबीएएम से संबंधित कोई नई छूट दी जाती है, तो हाल ही में हस्ताक्षरित ऐतिहासिक एफटी के मद्देनजर वही छूट भारत को भी दी जानी चाहिए।
दूसरा वादा : भारत-ईयू तकनीकी संवाद
दूसरा, भारत और यूरोपीय संघ जल्द ही एक तकनीकी कार्य समूह और संवाद शुरू करेंगे ताकि भारतीय उद्योग के लिए कार्बन बार्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) से संबंधित सभी मुद्दों पर पूरी पारदर्शिता लाई जा सके। मीडिया को मिली जानकारी के अनुसार, इनमें यह शामिल है कि किसी विशेष क्षेत्र के लिए सीबीएएम की गणना कैसे की जा रही है। ‘कार्बन’ तत्व को कैसे मापा जा रहा है और प्रस्तावित शुल्क लगाने की प्रक्रिया या फॉर्मूला क्या है।
तीसरा वादा: सत्यापन तंत्र पर मिला भरोसा
तीसरा, भारत ने यूरोपीय संघ के सीबीएएम सत्यापन तंत्र पर भी कुछ हद तक आश्वासन प्राप्त किया है कि भारतीय संस्थाओं को सबसे महत्वपूर्ण सत्यापन व्यवस्था में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी। जनवरी 2026 से, यूरोपीय संघ के बाहर के हर एक उत्पादक के लिए ग्रीनहाउस गैसों (जीएचजी) और कार्बन उत्सर्जन डेटा की सटीकता पर एक घोषणा करनी अनिवार्य है, जिसकी जांच और सत्यापन यूरोपीय संघ-सीबीएएम सत्यापनकर्ताओं और किसी तीसरे पक्ष लेखापरीक्षा संगठनों द्वारा किया जाना चाहिए, जो वर्तमान में अधिकतर यूरोपीय संघ में स्थित हैं।
असली मामला सत्यापन को लेकर ही है
भारत ने मांग की है कि भारत स्थित संगठनों को भी सीबीएएम सत्यापनकर्ता के रूप में भाग लेने की अनुमति दी जाए। तर्क यह है कि यदि संपूर्ण भारतीय उद्योग को अपने कार्बन फुटप्रिंट का सत्यापन केवल यूरोप स्थित संस्थाओं से ही प्राप्त करना होगा, तो इन तक पहुंच मुश्किल होने के साथ-साथ बहुत महंगी भी होगी। खासतौर पर छोटे उद्यमों के लिए, जिनके लाभ मार्जिन में कमी और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में नुकसान होने की संभावना है।
चौथा वादा: कार्बन मूल्य निर्धारण नीति
भारत को यह आश्वासन भी मिला है कि जैसे ही वह अपनी कार्बन मूल्य निर्धारण नीति-कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (सीसीटीएस) को पूरी तरह से लागू करेगा। इस व्यवस्था के तहत लगाए गए शुल्क और करों को सीबीएएम उद्देश्यों के लिए भी ध्यान में रखा जाएगा, ताकि भारतीय वस्तुओं पर दोहरा शुल्क या दोहरा कराधान न लगे। विद्युत मंत्रालय ने पहले ही सीसीटीएस को अधिसूचित कर दिया है, जिसका मकसद उद्योगों को उत्सर्जन में कमी और हरित/स्वच्छ प्रौद्योगिकियों की ओर समग्र परिवर्तन के लिए प्रोत्साहित करना है।
पांचवां वादा: जीवंत बातचीत करते रहेंगे
भारत की सीबीएएम रणनीति का पांचवां प्रमुख तत्व इस महीने यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौते की प्रकृति में निहित है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया है कि यह व्यवस्था एक कठोर ढांचा नहीं बल्कि एक जीवंत संवाद है जो समय-समय पर पैदा होने वाली चिंताओं को ध्यान में रखेगी, जिसमें सीबीएएम विशिष्ट मुद्दे भी शामिल हैं।
यह है इन पांच वादों का मकसद
ईयू-सीबीएएम मूल रूप से एक महत्वाकांक्षी पर्यावरण नीति है जिसका मकसद आयातित उत्पादों और घरेलू यूरोपीय संघ के उत्पादों पर समान कार्बन लागत लगाकर कार्बन रिसाव को रोककर 2050 तक जलवायु तटस्थता प्राप्त करना है। उर्वरक, हाइड्रोजन, बिजली, लोहा और इस्पात, सीमेंट और एल्युमीनियम प्रमुख चिंता के क्षेत्र हैं, क्योंकि ये कार्बन उत्सर्जन में अत्यधिक योगदान देते हैं। भारत के लौह और इस्पात क्षेत्र पर विशेष रूप से प्रभाव पड़ने की आशंका है, क्योंकि यूरोपीय संघ को भारत के निर्यात का लगभग 90% हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है।

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