ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि खेल की सुविधाएं और अवसर समाज की साझा संपत्ति हैं, इन्हें कुछ लोगों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। अदालत ने जोर देकर कहा कि खेल संस्थानों का संचालन पारदर्शी, पेशेवर और जनहित में होना चाहिए, ताकि खेल का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।
जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने राज्य क्रिकेट संघों को सुधार की पहल करने की सलाह दी। पीठ ने कहा कि राज्य संघों की जिम्मेदारी है कि वे जिला क्रिकेट संघों में भी सुशासन, बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता लागू करें। खिलाड़ियों के चयन, अनुबंध और प्रशासनिक फैसलों में निष्पक्षता जरूरी है। हितों के टकराव से बचना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अदालत ने यह टिप्पणी तिरुचिरापल्ली जिला क्रिकेट संघ की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। इस याचिका में मद्रास हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी गई है, जो मतदान और सदस्यता अधिकारों से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सदस्यता और संघ की संरचना से जुड़े मुद्दे फिलहाल हाईकोर्ट और संबंधित प्राधिकरण के समक्ष लंबित हैं, इसलिए उनका जल्द निपटारा किया जाना चाहिए। खेल राष्ट्रीय जीवन का अहम हिस्सा हैं। खेल लोगों को सामाजिक, भाषाई और सांस्कृतिक भेदभाव से ऊपर उठाकर एक मंच पर लाते हैं और भाईचारा मजबूत करते हैं।























