ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत में हर वर्ष 54 हजार करोड़ का दान दिया जाता है। दान का सबसे बड़ा आधार आम घर हैं। व्यक्तिगत दान का 45.9% हिस्सा धार्मिक संगठनों को जाता है। 41.8% दान सीधे बेहद गरीब, जरूरतमंद व भिक्षा मांगने वालों को मिलता है। गैर-धार्मिक संगठनों तक सिर्फ 14.9% दान पहुंचता है। यह बात ‘हाउ इंडिया गिव्स’ रिपोर्ट के तीसरे संस्करण में सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक देश में दान का सबसे बड़ा आधार आम घर हैं। कुल घरेलू दान का अनुमान हर साल 54 हजार करोड़ रुपए है। रिपोर्ट के मुताबिक 68% लोगों ने किसी न किसी रूप में देने की बात कही। दान में दिया बहुत सा खाना मुफ्त सामुदायिक रसोइयों तक जाता है। सेवा का सबसे आम रूप धार्मिक संस्थानों में काम है। रिपोर्ट में भारत में घरों के रोजमर्रा के दान का पैमाना, पैटर्न, वजहें बताई गई हैं।
– सर्वाधिक 45.9% दान धार्मिक संस्थाओं को
बताया गया है कि भारतीय दुनिया के सबसे उदार लोगों में हैं। यह अध्ययन 20 राज्यों में सर्वे पर आधारित है। इसका मकसद यह समझना रहा कि आम लोग नकद, सामान के रूप में मदद, सामाजिक कामों में कैसे योगदान देते हैं।
दान किस रूप में
4000–5000 रुपए महीना आय वाले आधे घर दान करते हैं। ऊंची आय पर भागीदारी 70 से 80% तक बढ़ जाती है।
दान की सबसे बड़ी वजह: 90% इसे धार्मिक कर्तव्य मानते हैं। आमने-सामने अपील सबसे असरदार कुल दान में नकद का हिस्सा 44 फीसदी है।
रिपोर्ट लॉन्च पर सीएसआईपी की डायरेक्टर और हेड जिनी उप्पल ने कहा कि ‘हाउ इंडिया गिव्स 2025-26’ की रिपोर्ट भारत की उस उदारता को सामने लाती है, जो हमेशा से रही है, पर कम आंकी गई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खपत आंकड़ों के आधार पर विश्लेषण करने से यह समझ आता है कि भारत कैसे दान देता है। यह भी पता चलता है कि देश के विकास की गति के साथ दान कैसे बदलता है।
हर आय वर्ग के लोग रोजाना करते हैं दान
रिपोर्ट के मुताबिक, रोजमर्रा का दान हर आय वर्ग में होता है। कम खपत स्तर 4 से 5 हजार रुपए महीना पर भी करीब आधे घर दान करते हैं। आय बढ़ने पर भागीदारी तेजी से बढ़ती है। रिपोर्ट ने दानदाताओं के चार प्रकार भी बताए हैं। ग्रासरूट, एस्पिरेशनल, प्रैक्टिकल, वेल-ऑफ गिवर्स। इनकी प्रेरणा, जागरूकता, जुड़ने की पसंद अलग-अलग बताई गई है।

























