मनोज सक्सेना
भारत में 1 अप्रैल 2026 से आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ा बदलाव हो चुका है। छह दशक पुराने आयकर कानून की विदाई हो चुकी। आयकर अधिनियम, 2025 अमल में आ गया है। वहीं, जीएसटी 2.0 के तहत घोषित एलानों के लागू होने के बाद अब देश का वित्तीय ढांचा पूरी तरह से बदलने की ओर बढ़ रहा है। इन बदलावों का सीधा असर आम आदमी के वेतन, बचत, रसोई गैस और रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ेगा, यह तय है। कर निर्धारण वर्ष 2026-27 से सरकार ने 12 लाख रुपये तक की आय को करमुक्त करने का एलान कर रखा है। दूसरी तरफ, पश्चिम एशिया के तनाव और नए विनियामक नियमों के कारण एलपीजी, दवाएं और कारें महंगी हो रही हैं।
जीएसटी 2.0 के तहत घोषित एलानों के लागू होने के बाद अब देश का वित्तीय ढांचा पूरी तरह से बदलने की ओर बढ़ रहा है। इन बदलावों का सीधा असर आम आदमी के वेतन, बचत, रसोई गैस और रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ेगा, यह तय है।
विभाग ने सलाह दी थी कि वित्त वर्ष के अंितम दिन तक ये कार्य अवश्य कर लिए जाएं-
टैक्स सेविंग और निवेश : धारा 80C और 80D के तहत टैक्स छूट पाने के लिए पीपीएफ, ईएलएसएस, और जीवन बीमा में निवेश, अन्यथा इसका लाभ चालू वित्त वर्ष में नहीं मिलेगा।
खातों को सक्रिय रखना : पीपीएफ, एनपीएस और सुकन्या समृद्धि योजना को निष्क्रिय होने और पेनल्टी से बचाने के लिए न्यूनतम अनिवार्य राशि जमा करना।
अपडेटेड रिटर्न: वित्तीय वर्ष 2020-21 (आकलन वर्ष 2021-22) के लिए अपडेटेड रिटर्न दाखिल करना।
विदेशी आय वालों के लिए : एनआरआई को विदेशी कर क्रेडिट का दावा करने के लिए फॉर्म इसी दिन तक जमा करना।
महंगाई का झटका: रसोई से लेकर सड़क तक बढ़ेगा खर्च
एलपीजी सिलेंडर : पश्चिम एशिया (विशेषकर ईरान-इज़राइल) तनाव के कारण दिल्ली में घरेलू गैस की कीमत ₹853 से बढ़कर ₹913 हो गई है। वहीं कमर्शियल सिलेंडर ₹115 महंगा होकर ₹1,883 पर पहुंच गया है, जिससे बाहर खाना-पीना महंगा होगा।
दवाएं : फार्मा कंपनियों की बढ़ती लागत के कारण एनपीपीए ने 900 से अधिक आवश्यक दवाओं (जैसे पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स) की कीमतों में 1.74% तक की वृद्धि को मंजूरी दी है।
कारों की कीमत में उछाल : आगामी बीएस-7 उत्सर्जन मानकों की तैयारी और बढ़ती लागत के कारण टाटा मोटर्स, होंडा (25,000-65,000 रुपये तक) और मर्सिडीज जैसी कंपनियों ने 1 अप्रैल से गाड़ियों के दाम बढ़ा दिए हैं।
बैंकिंग, पेंशन और बीमा के नए नियम
एटीएम और बैंक खाते : एचडीएफसी बैंक अब यूपीआई आधारित कार्डलेस निकासी को भी पांच मुफ्त ट्रांजेक्शन में गिनेगा। लिमिट पार करने पर ₹23 चार्ज लगेगा।
न्यूनतम बैलेंस न रखने पर बैंक अब मनमाना जुर्माना नहीं लगा सकेंगे, बल्कि यह शॉर्टफॉल (कमी) के अनुपात में होगा।
क्रेडिट कार्ड और पैन : नए पैन कार्ड के लिए अब सिर्फ आधार काफी नहीं होगा, 10वीं का सर्टिफिकेट या जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा। सभी डिजिटल पेमेंट के लिए सिर्फ ओटीपी नहीं, बल्कि बायोमेट्रिक जैसे 2एफए (डायनामिक फैक्टर) अनिवार्य कर दिए गए हैं।
एनपीएस निकासी : रिटायरमेंट पर अब 60% के बजाय 80% तक राशि एकमुश्त निकाली जा सकती है।
हेल्थ इंश्योरेंस : बीमा कंपनियों के लिए अधिस्थगन अवधि (मोरेटोरियम अवधि) घटाकर पांच वर्ष कर दी गई है।
आयकर अधिनियम 2025 से क्या-क्या बदल रहा?
पुराने आयकर अधिनियम, 1961 को आयकर अधिनियम 2025से बदल दिया गया है। अब असेसमेंट ईयर और प्रीवियस ईयर का झंझट खत्म कर इसे सिर्फ टैक्स ईयर 2026-27 कहा जाएगा।
नई टैक्स व्यवस्था : 12 लाख रुपये तक की शुद्ध वार्षिक आय वालों की टैक्स देनदारी शून्य कर दी गई है। इसके साथ ही वेतनभोगियों के लिए 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन जारी रहेगा।
पुरानी व्यवस्था में भारी छूट : बच्चों की शिक्षा भत्ता 100 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह और हॉस्टल भत्ता 300 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये कर दिया गया है। पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद और अहमदाबाद को भी एचआरए के लिए टियर-1 (50% छूट) में शामिल कर लिया गया है।
निवेश पर टैक्स : अब सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर मैच्योरिटी के समय कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग पर एसटीटी बढ़ा दिया गया है, और कंपनियों के शेयर बायबैक पर शेयरधारकों को टैक्स देना होगा।
विदेश यात्रा हुई सस्ती : ओवरसीज टूर पैकेज पर टीसीएस दर को 5% और 20% की दोहरी दर से घटाकर सीधे 2% कर दिया गया है।
जीएसटी में क्या सस्ता, क्या महंगा?
नई जीएसटी व्यवस्था में टैक्स स्लैब को 5%, 18% और 40% तक समेट दिया गया है।
राहत : स्वास्थ्य और जीवन बीमा, 33 जीवन रक्षक दवाएं, और अनपैक्ड डेयरी उत्पादों को 0% (टैक्स-फ्री) कर दिया गया है। छोटे कार, एसी, और टीवी अब 28% से घटकर 18% स्लैब में आ गए हैं।
महंगा : तंबाकू, लग्जरी वाहन, बड़ी एसयूवी और ऑनलाइन गेमिंग पर अब सबसे अधिक 40% जीएसटी लगेगा।
कराधान में जनता को दिया गया कितना आराम
1 अप्रैल 2026 से प्रभावशाली नई कर व्यवस्था में मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिली है। सरकार ने रिबेट (छूट) के माध्यम से दिया₹12 लाख तक की वार्षिक आय को कर-मुक्त किया गया है।
नौकरीपेशा लोगों के लिए मानक डि-आवंटन ₹75,000 और बच्चों के शिक्षा अलाउंस में भी पैकेज दिया गया है, जिसका उद्देश्य न्यूनतम आय है।
टैक्स में प्रमुख राहतें और बदलाव
शून्य कर सीमा : अब ₹12 लाख (और वेतनभोगियों के लिए ₹12.75 लाख तक सरकारी राहत के साथ) की आय पर कोई लागत नहीं है।
स्टैंडर्ड डिडक्शन (स्टैंडर्ड डिडक्शन): नई कर व्यवस्था में डलास क्लास के लिए अधिकतम ₹75,000 कर दिया गया है।
शिक्षा और दस्तावेज अलाउंस : शिक्षा भत्ते ₹300/माह से बढ़कर ₹3,000/माह और शैक्षिक भत्ते ₹300 से ₹9,000 प्रति माह प्रति बच्चा कर दिया गया है।
मेडिकल लोन छूट : मेडिकल लोन पर टैक्स छूट की सीमा ₹2 लाख कर दी गई है।
ट्रेडिंग में बदलाव : शेयर बाजार में फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर स्टॉक एक्सचेंज टैक्स को झटका लगा है, जिससे ट्रेडिंग में गिरावट आई है।
महत्वपूर्ण : अगर सरकारी राहत नहीं है, तो पूरे महीने टैक्स पर ₹12 लाख से ज्यादा की आय होती है, लेकिन इस बार नई व्यवस्था में राहत दी गई है।
| नया टैक्स रिकार्ड (वित्तीय वर्ष 2025-26) | |
|---|---|
| आय सीमा | टैक्स दर |
| ₹0 – ₹4 लाख | शून्य |
| ₹4 – ₹8 लाख | 5% |
| ₹8 – ₹12 लाख | 10% |
| ₹12 – ₹16 लाख | 15% |
| ₹16 – ₹20 लाख | 20% |
| ₹20 – ₹24 लाख | 25% |
| ₹24 लाख से अधिक | 30% |













