ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। आजकल एयरकंडीशनर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। घर से लेकर ऑफिस तक, दिन का ज्यादातर हिस्सा एसी में गुजरता है। इसके अपने फायदे हैं, लेकिन कुछ नुकसान भी होते हैं।
लगातार ठंडी और ड्राई हवा में रहने से इम्यूनिटी कमजोर पड़ सकती है। साथ ही बंद कमरे का माहौल और टेम्परेचर में बार-बार बदलाव सेहत के लिए चुनौती बन सकता है। ऐसे में जरूरी है कि एसी के इस्तेमाल के साथ अपनी सेहत का भी ध्यान रखें।
एसी की हवा हमारे शरीर को कैसे प्रभावित करती है? इसके जवाब में एक्सपर्ट्स का कहना है कि एसी की ठंडी-शुष्क हवा स्किन और रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को ड्राई कर सकती है। लगातार ठंडे टेम्परेचर में रहने से शरीर की थर्मोरेगुलेशन प्रक्रिया स्लो हो जाती है।
कम वेंटिलेशन वाले कमरों में कार्बन डाइऑक्साइड और इनडोर पॉल्यूशन बढ़ सकता है।
एयर फ्लो के सामने बैठने से आंखों में ड्राईनेस और जलन हो सकती है।
टेम्परेचर में बार-बार बदलाव से मसल स्टिफनेस और सिरदर्द हो सकता है।
एसी फिल्टर गंदा होने पर एलर्जन और धूल के कण से इन्फेक्शन हो सकता है।
लगातार ठंडे वातावरण में रहने से शरीर बाहरी टेम्परेचर के अनुसार एडजस्ट नहीं हो पाता है। इससे इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है।
ड्राई एयर से म्यूकस मेम्ब्रेन (गले की प्रोटेक्टिव लेयर) की नमी घट जाती है। इससे संक्रमण हो सकता है।
धूप न मिलने से विटामिन-डी की कमी हो सकती है।
बंद जगहों में वायरस और बैक्टीरिया का ट्रांसमिशन तेजी से होता है। देर तक ठंडी हवा में रहने से सर्दी-जुकाम, गले में खराश और खांसी हो सकती है।
स्किन ड्राईनेस और डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है, जिससे स्किन बैरियर कमजोर होता है।
इम्यून सिस्टम कमजोर क्यों होता है? इस पर विशेषज्ञों ने बताया कि गर्मी में लंबे समय तक एसी में रहने से शरीर का टेम्परेचर थर्मल एडैप्टेशन (टेम्परेचर के अनुसर बॉडी एडजस्टमेंट) कमजोर हो जाता है।
ठंडी-शुष्क हवा से रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट की म्यूकस लेयर ड्राई हो जाती है। इससे इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है।
बंद कमरों में ताजी हवा कम मिलने से माइक्रोब्स का एक्सपोजर बढ़ सकता है।
लो टेम्परेचर से ब्लड सर्कुलेशन और मेटाबॉलिक एक्टिविटी प्रभावित हो सकती है।
धूप न मिलने से विटामिन-डी सिंथेसिस घटता है, जिससे इम्यून फंक्शन कमजोर हो जाता है।
बार-बार ठंडे-गर्म माहौल में जाने से शरीर पर फिजियोलॉजिकल स्ट्रेस (बॉडी पर काम का दबाव) बढ़ता है।
क्या हर वक्त एसी में रहने वाले लोग जल्दी बीमार पड़ते हैं? ऐसा नहीं है, लेकिन लगातार एसी में रहने से बाहरी मौसम के प्रति शरीर की सहनशीलता कम हो सकती है।
लो एयर सर्कुलेशन वाले कमरों में संक्रमण का रिस्क बढ़ जाता है।
टेम्परेचर में बदलाव का अनुभव न होने से थर्मल एडैप्टेशन प्रभावित होता है।
धूप न मिलने से सर्केडियन रिद्म और हॉर्मोनल इंबैलेंस हो सकता है।
ठंडे माहौल में बैठने से नाक-गले में इन्फेक्शन हो सकता है।
एसी का टेम्परेचर बहुत कम रखने से शरीर के डिफेंस मैकेनिज्म पर प्रभाव पड़ता है?
लो टेम्परेचर से शरीर को हीट कंजर्व करने के लिए लगातार काम करना पड़ता है। इससे ब्लड वेसल्स संकुचित हो सकती हैं और इम्यून रिस्पॉन्स स्लो हो सकता है।
नाक और गले की नेचुरल क्लीनिंग प्रोसेस धीमी पड़ जाती है।
ठंडी हवा से व्हाइट ब्लड सेल्स की एफिशिएंसी प्रभावित हो सकती है, जिससे संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम होती है।













