ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। अपनी ड्रोन हमले की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए, भारतीय सेना को आपातकालीन खरीद (ईपी-6) के तहत अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस से दो नए स्वदेशी लड़ाकू सिस्टम मिले हैं – यूएवी-लॉन्च्ड प्रिसिजन गाइडेड म्यूनिशन और अग्निका वीटोल-1 फर्स्ट-पर्सन व्यू कामिकाज़े ड्रोन।
ये दोनों सिस्टम पूरी तरह से स्वदेशी रूप से डिज़ाइन, विकसित और निर्मित किए गए हैं और ऊंचे इलाकों में किए गए परीक्षणों में सफलतापूर्वक प्रमाणित हुए हैं।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के सहयोग से विकसित, यूएलपीजीएम बहुत सटीक हमले करता है। दूसरी ओर, अग्निका वीटोल-1 को शहरी और खुले, दोनों तरह के युद्धक्षेत्रों के लिए डिज़ाइन किया गया है; इसमें जीपीएस-रहित और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध वाले माहौल में भी प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता है। ये सिस्टम कुछ दिन पहले अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस द्वारा सेना की पश्चिमी कमान को सौंपे गए थे।
यूएलपीजीएम एक ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ (लड़ाकू गोला-बारूद) है, जिसे यूएवी के साथ इंटीग्रेट करके हल्के और भारी लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है; इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (ईवी) के माहौल में लचीलेपन के लिए इसमें एक ‘रिट्रैक्टेबल प्लेटफॉर्म’ भी लगा है। इसमें 2 किलोग्राम का वारहेड लगा है, जिसकी सटीकता 1 मीटर ‘सर्कुलर एरर प्रोबेबल’ है। अग्निका
वीटोल-1 एक एफपीवी कामिकाज़े ड्रोन है, जो 30 मिनट तक उड़ान भर सकता है और इसकी गति 60 किलोमीटर प्रति घंटा है।













