ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश में कम्युनिटी के स्तर पर चलाई जा रही प्राकृतिक खेती (एपीसीएनएफ) को दुनिया का सबसे बड़ा पर्यावरण पुरस्कार मिला है। इस पुरस्कार का नाम ‘2026 फूड प्लैनेट प्राइज़’ है। 15 लाख अमेरिकी डॉलर (1.5 मिलियन डॉलर) का यह पुरस्कार स्वीडन के बास्ताद में दिया गया।
साल 2026 के ‘फूड प्लैनेट प्राइज’ के लिए दुनिया भर से 1,000 से अधिक प्रोजेक्ट्स और नामांकन भेजे गए थे। कमेटी ने इनमें से 6 महाद्वीपों और 19 देशों के 35 बेहतरीन प्रयासों को शॉर्टलिस्ट किया। कड़ी स्क्रीनिंग के बाद, आखिरी पड़ाव में केवल 4 फाइनलिस्ट चुने गए, जिनमें से आंध्र प्रदेश की प्राकृतिक खेती के इस मॉडल ने दुनिया में पहला स्थान हासिल किया।
आंध्र प्रदेश सरकार के कृषि विभाग की संस्था ‘रैतु साधिकारा संस्था’ द्वारा 2016 में शुरू किए गए एपीसीएनएफ की परिकल्पना किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने और उन्हें सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। वर्षों के दौरान, इस आंदोलन ने यह प्रदर्शित किया है कि महिलाओं के नेतृत्व वाली संस्थाओं, किसान-से-किसान सीखने की प्रक्रिया, सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों और सरकार की मजबूत भागीदारी के माध्यम से प्राकृतिक खेती का बड़े पैमाने पर विस्तार किया जा सकता है।
एपीसीएनएफ के अनुभव को अब भारत के 22 राज्यों और दो देशों श्रीलंका और ज़ाम्बिया में साझा किया जा रहा है। यह प्राकृतिक खेती को समर्थन देने वाले एक विस्तार योग्य मॉडल के रूप में इसकी बढ़ती राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मान्यता को दर्शाता है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर सशक्त हुई ग्रामीण महिलाओं ने अपने परिवारों में प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए बदलाव की मजबूत नींव रखी है।
इस महा-अभियान की असली ताकत ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले ‘किसान गुरु’ हैं। राज्य के 10,000 से अधिक अनुभवी किसान खुद गुरु बनकर 18 लाख अन्य किसानों को प्राकृतिक खेती के गुर सिखा रहे हैं।
साथ ही, 1,000 से अधिक सक्रिय मार्गदर्शक और 700 से ज्यादा किसान शोधकर्ता इसके वैज्ञानिक आधार को मजबूत करने में जुटे हैं, जिन्हें राज्य सरकार के कृषि विभाग का पूरा सहयोग मिल रहा है।













