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एआई की दुनिया

by Blitz India Media
February 15, 2025
in Hindi Edition
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दीपक द्विवेदी

भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है और आने वाले समय में हम एक शुद्ध एवं सक्षम भारतीय एआई मॉडल की उम्मीद अवश्य कर सकते हैं।

गत कुछ वर्षों एवं विभिन्न कारणों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या एआई) बराबर चर्चा में बनी हुई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंप्यूटर विज्ञान की एक ऐसी शाखा है जिसका काम बुद्धिमान मशीन बनाना है। विशेषज्ञ तो अब यह मानने लगे हैं कि आने वाला समय सिर्फ और सिर्फ एआई का ही होगा। जो एआई में दक्ष होगा दुनिया उसी की मुट्ठी में होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शुरुआत 1950 के दशक में ही हो गई थी लेकिन इसकी महत्ता को 1970 के दशक में पहचान मिली। जापान ने सबसे पहले इस ओर पहल की और 1981 में फिफ्थ जनरेशन नामक योजना की शुरुआत की थी। इसमें सुपर-कंप्यूटर के विकास के लिए 10 वर्षीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी। इसके बाद अन्य देशों ने भी इस ओर ध्यान दिया।
वर्तमान दौर को एआई को लेकर किए जा रहे प्रयोगों का दौर कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। आजकल एआई का प्रमुख रूप से प्रयोग कंप्यूटर गेमिंग, प्राकृतिक भाषा की प्रोसेसिंग, एक्सपर्ट सिस्टम, विजन सिस्टम, स्पीच रिकॉग्निशन एवं बुद्धिमान रोबोट तैयार करने में किया जा रहा है। इसके अलावा नई दवाएं तैयार करने, नए केमिकल तलाशने, खनन उद्योग से लेकर अंतरिक्ष, शेयर बाजार से लेकर बीमा कंपनियों तथा मानव जीवन का कोई क्षेत्र ऐसा नहीं बचा है जहां एआई का दखल न हो।

अब बात करते हैं चीन की एक एआई कंपनी डीपसीक की जिसने इस क्षेत्र में आजकल तहलका मचा रखा है। डीपसीक की स्थापना जुलाई 2023 में हुई है। इसके संस्थापक लिआंग वेनफेंग हैं। यह मॉडल गणित कोडिंग और जनरल नॉलेज से जुड़े कामों का बेहद कारगर जवाब दे रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण इसकी तीव्र गति है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए पहले के जो एआई एप उपलब्ध हैं, उनसे कहीं ज्यादा तेजी से यह काम करता दिख रहा है। यदि यही तेजी बनी रहती है तो एआई की दुनिया में डीपसीक के वर्चस्व का कोई विकल्प नहीं होगा। डीपसीक के आर1 को चैटजीपीटी से बेहतर बताया जा रहा है और यह महंगे हार्डवेयर पर भी निर्भर नहीं है। आंकड़े बताते हैं कि डीपसीक को जितने समय में 160 लाख बार डानउलोड किया गया है उतने ही समय में ओपनए आई के चैटजीपीटी को 10 लाख बार ही डाउनलोड किया गया था।

डीपसीक का भारत में भी सर्वाधिक डाउनलोड होना कतई नहीं चौंकाता। वैसे तो पूरी दुनिया में डीपसीक के एप को डाउनलोड किया जा रहा है लेकिन भारत में सर्वाधिक लगभग 16 प्रतिशत से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं। चीन ने एक बार फिर दिखा दिया है कि वह सिर्फ अमेरिका को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को चुनौती देने के लिए तैयार है। एक छोटी-सी चीनी कंपनी, जो केवल दो साल पुरानी है, उसने ऐसा एआई मॉडल बना डाला जो अब ओपन-सोर्स है और दुनिया के लिए मुफ्त में उपलब्ध है। डीपसीक इसलिए और हैरान कर रहा है, क्योंकि इसको सिर्फ 5.1 अरब डॉलर के बजट में तैयार किया गया है, जो अमेरिकी एआई उत्पादों के मुकाबले 100 गुना कम है। चीन ने यह सब उस वक्त किया जब अमेरिका ने एडवांस्ड चिप और तकनीकी आपूर्ति को लेकर उस पर सख्त पाबंदियां लगा रखी हैं। आज चीन छठी पीढ़ी के फाइटर जेट, री-यूजेबल स्टारशिप, कृत्रिम सूर्य और एक ट्रिलियन डॉलर की तकनीकी अर्थव्यवस्था जैसी उपलब्धियों से समूची दुनिया को चौंका रहा है। हालांकि इसका एक दूसरा पहलू यह भी है कि चीन ने नया बनाया क्या है? वहां वही सब बनता है जिसका आविष्कार अमेरिका या यूरोप में हो चुका होता है। तकनीक पश्चिम की लेकिन उत्पादन चीन में। अगर अमेरिका में एआई बनने से पहले चीन दुनिया को एआई देता तो बात कुछ और ही होती। दुखद यह है कि इस पर हलचल अमेरिका में हुई लेकिन कुछ लोग भारत पर सवाल दाग रहे हैं कि जब चीन ऐसा कर सकता है और इतना सस्ता एआई मॉडल बना सकता है तो फिर भारत क्यों नहीं? भारत में ऐसे सवाल पूछे जा सकते हैं पर चीन में नहीं। यही नहीं; चीनी एआई से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बारे में पूछिए तो वह इसकी आलोचना नहीं करता। यही कारण है कि तमाम देश चीन के एआई को बेनकाब करने लगे हैं।

भारत में भी अब एआई का अपना मॉडल तैयार करने की ओर कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत आने वाले महीनों में एआई का अपना फाउंडेशनल यानी मूलभूत मॉडल तैयार करेगा जो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मॉडल से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होगा। केंद्रीय मंत्री ने एक एआई सुरक्षा संस्थान स्थापित किए जाने की भी घोषणा की। उन्होंने इंडिया एआई मिशन की प्रगति पर रोशनी डाली जो पहले से ही अपने शुरुआती ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट जीपीयू लक्ष्यों को पार कर चुका है। हाल ही में पेश 2025-26 के केंद्रीय बजट में भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एआई के क्षेत्र में बड़े बदलावों की घोषणा की है। उन्होंने एआई के लिए एक्सीलेंस फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तहत 500 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की। यह कदम भारत को एआई के क्षेत्र में एक वैश्विक लीडर बनाने के प्रयास का हिस्सा है जिससे देश में इस तकनीकी क्षेत्र में अनुसंधान, विकास और नवाचार को बढ़ावा मिल सके। भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है और आने वाले समय में हम एक शुद्ध एवं सक्षम भारतीय एआई मॉडल की उम्मीद अवश्य कर सकते हैं।

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