ब्लिट्ज ब्यूरो
यह कर्तव्य-प्रेरित दर्शन विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप है जो आकांक्षाओं को ठोस प्रगति में परिवर्तित करने और 2047 तक अपार संभावनाओं को उजागर करने का लक्ष्य रखता है।
केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने गत 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। यह नवनिर्मित कर्तव्य भवन में पेश किया गया पहला बजट है। युवा शक्ति को केंद्र में रखकर प्रस्तुत यह बजट ‘विकसित भारत’ की दृष्टि पर आधारित है और ‘दुविधा के बजाय कार्रवाई’, ‘नारेबाजी के बजाय सुधार’ तथा ‘लोकलुभावन के बजाय जनकल्याण’ जैसे मार्गदर्शक सिद्धांतों को प्रतिबिंबित कर रहा है। खास बात यह है कि यह बजट तीन कर्तव्यों द्वारा निर्देशित है जिनका उद्देश्य आर्थिक विकास को गति देना, लोगों की क्षमताओं का निर्माण करना और समावेशी विकास को सुनिश्चित करना है। बजट में विकास को बनाए रखने और दीर्घकालिक आर्थिक लचीलापन बनाने के लिए राजकोषीय अनुशासन, सार्वजनिक निवेश और प्रौद्योगिकी-आधारित सुधारों पर पूरा फोकस है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक विकास को प्राथमिकता दी है जिसमें व्यापक सुधारों, राजकोषीय विवेक और सतत सार्वजनिक निवेश पर जोर दिया गया है। भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण व्यापार, पूंजी प्रवाह और आपूर्ति श्रंखलाओं में उतार-चढ़ाव से चिह्नित बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच, बजट भारत की दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती को सुदृढ़ करते हुए विकास की गति को बनाए रखने की सुनियोजित रणनीति को रेखांकित कर रहा है। तत्काल राजकोषीय प्रोत्साहन पर निर्भर रहने के बजाय सरकार राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के लिए प्रतिबद्ध है और संसाधनों को अवसंरचना, विनिर्माण, रोजगार सृजन और क्षमता वृद्धि की ओर निर्देशित कर रही है। यह रणनीतिक दृष्टिकोण व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखता है, नीतिगत विश्वसनीयता को मजबूत करता है और निजी क्षेत्र के निवेश के लिए अनुकूल परिस्थितियां उत्पन्न करता है जो वर्तमान वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए एक महत्वपूर्ण कारक है। यह कर्तव्य-प्रेरित दर्शन विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप है जो आकांक्षाओं को ठोस प्रगति में परिवर्तित करने और 2047 तक अपार संभावनाओं को उजागर करने का लक्ष्य रखता है।
अगर यह कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि तेजी से बदलती वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच पेश किया गया यह उम्मीदों भरा बजट है। हालांकि अब भारत- अमेरिका के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर सहमति हो जाने की घोषणा के बाद अमेरिकी टैरिफ का दबाव तो कम हो गया है पर सरकार ने शुरुआती स्तर पर इस दबाव से बचने के लिए जीएसटी दरों में पहले ही कटौती कर दी थी ताकि घरेलू बाजार में तेजी बनी रहे। इससे तीसरी तिमाही के परिणाम भी उत्साहवर्धक रहे। देश की विकास दर को खुद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने सात फीसद से ज्यादा माना है। मगर उसके बाद भी सरकार का सारा ध्यान मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से निर्यात को बढ़ाने और विदेशी पूंजी निवेश की तरफ चला गया और इस बजट पर उसकी छाया भी साफ नजर आती है। विभिन्न देशों और यूरोपीय संघ के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों से सरकार ने सेवा क्षेत्र के अंतर्गत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र पर भरोसा जताया और वित्तीय सीमा को तीन सौ करोड़ रुपए से बढ़ाकर दो हजार करोड़ रुपए कर दिया गया। आने वाले समय में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की विभिन्न सुविधाओं में भी सरलीकरण देखने को मिलेगा और लागत में कमी आएगी, कार्य कुशलता बढ़ेगी, देश की पहचान और तेजी से बढ़ेगी।
बजट की विशेषता यह भी है कि यह आर्थिक मोर्चे पर संतुलित व सतर्क, पूंजी निर्माण के मामले में उदार, और सुधारों के स्तर पर विवेकपूर्ण नजर आता है। बजट में पूंजीगत व्यय 12.2 लाख करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया है जो गत वर्षों की तुलना में करीब नौ प्रतिशत ज्यादा है। बजट का मुख्य जोर परिवहन, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा प्रणालियों और शहरी बुनियादी ढांचे पर बना हुआ है। लगातार पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) से लॉजिस्टिक्स लागत घटती है, उत्पादकता में सुधार होता है और निजी निवेश के लिए मांग का एक स्थिर और भरोसेमंद माहौल तैयार होता है। बजट में एक अहम संस्थागत पहल के रूप में इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड की घोषणा की गई है। इसका उद्देश्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आंशिक क्रेडिट गारंटी उपलब्ध कराना है ताकि शुरुआती चरण के उस जोखिम को कम किया जा सके जो प्रायः दीर्घकालिक निजी निवेश को रोकते हैं। बजट में क्षेत्रीय और भौगोलिक दोनों स्तरों पर सात रणनीतिक विनिर्माण क्षेत्रों में उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, बायोफार्मा, रसायन, स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े घटक और अन्य महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रंखला के क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है। कुल मिला कर बजट की सफलता घोषणाओं पर कम और क्रियान्वयन पर ज्यादा निर्भर करेगी। खासकर एमएसएमई भुगतान सुधारों, इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी व सिटी-रीजन नियोजन जैसे क्षेत्रों में। इसे योजना के अनुसार लागू किया गया तो आने वाले वर्षों में स्थायी, कम लागत वाली वृद्धि के लिए नींव को मजबूत करेगा; इसमें कोई दो राय नहीं।
































