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Daughter of a pakora-namkeen seller becomes IAS

पकौड़े-नमकीन बेचने वाले की बेटी बनी आईएएस

August 22, 2025
बिहार में शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य में अब प्रारंभिक स्कूलों (कक्षा 1 से 8वीं तक) में टीचर की सरकारी नौकरी के लिए पात्रता परीक्षा (बिहार एस्टेट) आयोजित नहीं की जाएगी। इससे पहले बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा के चौथे चरण को लेकर स्टेट टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट का इंतजार किया जा रहा था। उम्मीदवारों की मांग थी कि बीपीएससी टीआरई 4 से पहले एसटीईटी कराया जाए। कैसे बनेंगे टीचर बिहार में अब एसटीईटी के बजाय केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटेट ) के आधार पर टीचर की सरकारी नौकरी मिलेगी। हालांकि शिक्षा विभाग ने पहले कहा था कि वर्तमान में यह परीक्षा नहीं ली जाएगी, लेकिन भविष्य में पात्रता परीक्षा आयोजित की जा सकती है। अब सीटेट के बेसिस पर भर्ती होगी और अलग से टीईटी नहीं होगा। राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षा न होने से बिहार के उम्मीदवारों को थोड़ा नुकसान हो सकता है। इसकी कई वजहें हैं- सीटेट का सिलेबस एनसीईआरटी पर आधारित होता है, जबकि एसटीईटी एससीईआरटी या बोर्ड आधारित होता है। एसटीईटी की तुलना में सीटेट थोड़ा कठिन माना जाता है क्योंकि सीटेट नेशनल लेवल एग्जाम है और एसटीईटी स्टेट लेवल का है। सीटेट में क्षेत्रीय भाषाओं की परीक्षा नहीं होती। हालांकि मैथिली को शामिल करने का फैसला लिया गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि राज्य टीईटी स्थानीय जरूरतों को बेहतर तरीके से कवर करता है। इससे राज्य स्तर की नौकरियों पर फर्क पड़ सकता है। इसके कुछ फायदे भी हैं सिर्फ एक एग्जाम देना होगा। अलग से एसटीईटी देने की जरूरत नहीं है। सीटेट और एसटीईटी की अलग-अलग तैयारी करने का बोझ खत्म होगा। सीटेट साल में दो बार आयोजित किया जाता है। इसलिए अधिक उम्मीदवारों को पात्रता हासिल करने का मौका मिलेगा। सीटेट के जरिए भर्ती प्रक्रिया में तेजी आ सकती है। क्वालीफाई करने वाले उम्मीदवार केंद्र सरकार के स्कूलों में भी अप्लाई कर सकते हैं। इससे करियर ऑप्शन बढ़ेंगे। सीटेट में पेडागॉजी और चाइल्ड डेवलेपमेंट पर ज्यादा फोकस होता है जिससे टीचर्स की क्वालिटी बढ़ेगी।

बिहार में नहीं होगी शिक्षक पात्रता परीक्षा

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पकौड़े-नमकीन बेचने वाले की बेटी बनी आईएएस

by Blitz India Media
August 22, 2025
in Hindi Edition
Daughter of a pakora-namkeen seller becomes IAS

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बिहार में नहीं होगी शिक्षक पात्रता परीक्षा

सीबीएसई 12वीं के छात्रों को देगा अंकों में सुधार का मौका

ब्लिट्ज ब्यूरो

भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर में अटल बांध इलाके में रहने वाली दीपेश कुमारी एक स्टार हैं और उनसे भी बड़े सितारे हैं उनके पिता गोविंद कुमार जिन्होंने 25 साल तक पकौड़े-नमकीन जैसे स्नैक्स बेचकर 7 लोगों के परिवार का पालन पोषण किया और अपने पांचों बच्चों को शानदार शिक्षा के दम पर उनके पैरों पर खड़ा किया। उनकी एक बेटी दीपेश कुमारी ने न सिर्फ आईआईटी से पोस्ट ग्रेजुएशन करके शानदार क्वालिफिकेशन हासिल की बल्कि यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जाम में टॉपर वाली रैंक हासिल करके अधिकारी भी बनीं।
छोटे से कमरे में रहने वाला 7 लोगों का परिवार
भले ही दीपेश अपने 7 लोगों के परिवार के साथ एक छोटे से कमरे में रहती थीं, भले ही पर्याप्त सुख सुविधाएं नहीं थीं लेकिन उन्होंने इन मुश्किलों के आगे बड़े सपने देखने में कोई कसर नहीं छोड़ी और इसी का नतीजा हुआ कि वह एक आईएएस अफसर बनने तक के सफर को पूरा कर सकीं।
स्कूल से आईआईटी तक का सफर, फिर यूपीएससी के लिए सब छोड़ा
दीपेश कुमारी अपने 5 भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं और बचपन से ही पढ़ाई में बहुत अच्छी थीं। उन्होंने शिशु आदर्श विद्या मंदिर में पढ़ाई की। 10वीं में उन्होंने 98 प्रतिशत और 12वीं में 89 प्रतिशत अंक हासिल किए।
इसके बाद उन्होंने एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज, जोधपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। फिर आईआईटी बॉम्बे से एमटेक किया। एक साल तक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने के बाद, उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए नौकरी छोड़ दी।
दीपेश को 2020 में अपने पहले यूपीएससी प्रयास में सफलता नहीं मिली लेकिन उन्होंने और भी मेहनत से तैयारी की। अपनी नौकरी से बचाए हुए पैसों से दिल्ली में यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी की। उनकी मेहनत रंग लाई।
2021 में ईडब्ल्यूएस ऑल इंडिया चौथी रैंक
साल 2021 में अपनी दूसरी कोशिश में उन्होंने ऑल इंडिया 93वीं रैंक हासिल की। उन्हें आईएएस अफसर के तौर पर चुना गया। उन्होंने ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में भी चौथी रैंक भी हासिल की, यानी एक तरह से वह एक टॉपर कैंडिडेट बनकर उभरीं और आईएएस बनने का सपना साकार किया।
भाई-बहनों ने भी देखे बड़े सपने
आईएएस की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद दीपेश कुमारी को झारखंड कैडर मिला। वह अपने छोटे भाई-बहनों के लिए एक मिसाल बन गईं, जिन्होंने खुद भी बड़े सपने देखे। दीपेश की छोटी बहन डॉक्टर बनीं, जो सफरदरजंग अस्पताल में सेवारत हैं। दो भाई लातूर में और दूसरा एम्स गुवाहाटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। अगर मन में ठान लो तो कोई भी मुश्किल आसान हो जाती है।

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