ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत में साल 2027 में जनगणना होगी। इसके लिए केंद्र सरकार ने 11,718 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। खास बात यह है कि देश में पहली बार जनगणना डिजिटल होगी और प्रत्येक व्यक्ति की गिनती पर करीब 97 रुपए का खर्च आएगा। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे मोदी सरकार का ऐतिहासिक निर्णय बताया है।
एमपी के सीएम मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह लोकतंत्र में जनता के अधिकार को अधिक सुरक्षित बनाने के साथ कर्तव्य बोध के प्रति जागरूक करने का श्रेष्ठ प्रयास सिद्ध होगा। जनगणना 2027 को लेकर केंद्रीय कैबिनेट की मीटिंग हुई, जिसमें जनगणना बजट को मंजूरी दी गई। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार देशभर में 30 लाख कर्मचारी डिजिटल जनगणना पूरी करेंगे। इसके लिए विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग होगा।
जनगणना 2027 में कौन सा एप काम आएगा?
भारत में पहली बार हो रही पेपरलेस जनगणना के लिए विशेष एप तैयार किया गया है। इसमें प्री-कोडेड ड्रॉपडाउन मेन्यू होंगे, जिनमें जनगणना से जुड़े सभी प्रश्न पहले से दिए होंगे। जानकारी सीधे एप में दर्ज की जाएगी और डेटा सीधे बैकएंड सिस्टम में जाएगा, जिससे अलग से मैनुअल कंपाइलेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी। एप में इंटेलिजेंट कैरेक्टर रिकॉग्निशन तकनीक भी होगी, जिससे हाथ से लिखे या अधूरे वाक्यों को भी पढ़ा जा सकेगा।
दो चरणों में होगी जनगणना 2027
पहला फेज (अप्रैल–सितंबर 2026): इसमें घरों की लिस्टिंग और गिनती (गृह सूचीकरण एवं आवास जनगणना) होगी। हिम प्रभावित क्षेत्रों-जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में जनसंख्या गणना सितंबर 2026 में आयोजित की जाएगी।
दूसरा फेज (फरवरी 2027): इसमें जनसंख्या की गिनती की जाएगी। इस दौरान जाति संबंधी डेटा भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से संकलित किया जाएगा।
भारत में आबादी कितनी है?
प्रति व्यक्ति 97 रुपए लागत का अनुमान 2011 की जनगणना (121 करोड़ आबादी) के आधार पर निकाला गया है। अगर 2027 में भारत की अनुमानित आबादी 150 करोड़ मानी जाए, तो प्रति व्यक्ति अनुमानित खर्च करीब 78 रुपए बैठेगा।
































