ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। देश में बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने और निजी निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से वित्त मंत्रालय ने एक बड़ी घोषणा की है। मंत्रालय ने सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत कार्यान्वित की जाने वाली 852 परियोजनाओं की तीन साल की पाइपलाइन का खाका पेश किया है। इनकी कुल अनुमानित लागत 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
यह कदम केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई घोषणाओं के अनुरूप उठाया गया है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) की ओर से तैयार की गई यह योजना वित्त वर्ष 2026 से शुरू होगी। मंत्रालय की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इन परियोजनाओं में केंद्र सरकार के मंत्रालयों और राज्य सरकारों दोनों की हिस्सेदारी है।
कुल राशि में से केंद्रीय अवसंरचना मंत्रालय 13.15 लाख करोड़ रुपये के व्यय वाली 232 पीपीपी परियोजनाओं का नेतृत्व करेंगे। वहीं, 20 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश मिलकर 3.84 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 620 परियोजनाओं का कार्यान्वयन करेंगे।
सड़क और ऊर्जा क्षेत्र पर सबसे बड़ा दांव केंद्रीय मंत्रालयों के पोर्टफोलियो पर नजर डालें तो सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का दबदबा कायम है। मंत्रालय के पास अधिकतम 108 परियोजनाएं हैं, जिनका कुल परिव्यय 8.76 लाख करोड़ रुपये है।
इसके बाद विद्युत मंत्रालय की 46 परियोजनाएं हैं जिनका कुल बजट 3.4 लाख करोड़ रुपये। रेल मंत्रालय की 13 परियोजनाओं का कुल बजट 30,904 करोड़ रुपये है। जल संसाधन विभाग की 29 परियोजनाएं पर कुल व्यय 12,254 करोड़ रुपये करने का प्लान है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की 11 परियोजनाओं का आवंटन 2,262 करोड़ रुपये होगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत 8,743 करोड़ रुपये की एक परियोजना और उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के तहत 6,646 करोड़ रुपये की 2 परियोजनाएं शामिल हैं।
राज्यों में आंध्र प्रदेश सबसे आगे
राज्यवार विश्लेषण से पता चलता है कि आंध्र प्रदेश पीपीपी परियोजनाओं के मामले में सबसे आगे है। राज्य में 1.16 लाख करोड़ रुपये के व्यय वाली 270 परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इसके बाद तमिलनाडु का स्थान है, जहां 87,640 करोड़ रुपये की 70 परियोजनाएं हैं। मध्य प्रदेश में 65,496 करोड़ रुपये की 21 परियोजनाएं और जम्मू-कश्मीर में 21,374 करोड़ रुपये की 57 परियोजनाएं पाइपलाइन में शामिल हैं।































