ब्लिट्ज ब्यूरो
बरेली। कभी आर्थिक तंगी से जूझ रहीं बरेली की गीता आज महिलाओं की आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई हैं। गीता ने दो साल पहले जो बीज बोया था, आज वह सशक्तीकरण की मिसाल बन चुका है। उन्होंने न सिर्फ खुद की जिंदगी संवारी बल्कि अपने साथ दस और महिलाओं को आर्थिक मजबूती की राह दिखाई। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिलाओं की आजीविका में वृद्धि करने व उन्हें आत्मनिर्भर बनाये जाने का अभियान चल रहा है। आलमपुर जाफराबाद विकास खंड की सिरसा बिछुरिया ग्राम पंचायत की गीता भी इस अभियान से जुड़ीं।
गीता ने एक महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया। शुरू में संसाधन कम थे, लेकिन हौसला बुलंद। समूह की दस महिलाओं को उन्होंने आजीविका की नई राह दिखाई। गीता ने बैंक से चार प्रतिशत ब्याज की दर पर दो लाख रुपये का लोन लेकर गुलाब फूल की खेती शुरू की। धीरे-धीरे आसपास के गांव में उनकी पहचान बनने लगी। आज समूह की दस महिलाएं घर के कामकाज निपटाने के साथ हर महीने लगभग 1.50 लाख से 2 लाख रुपये की कमाई कर रही हैं। इससे न सिर्फ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी है, बल्कि गांव की अन्य महिलाएं भी समूह से जुड़ने की इच्छा जताने लगी हैं।
दूसरी महिलाओं को कर रहीं प्रेरित
महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की इस पहल की सराहना खुद सीडीओ देवयानी ने भी की। गीता कहती हैं कि अगर विश्वास और मेहनत हो तो कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है। हमने शुरू में कठिनाइयां झेलीं, लेकिन आज हमारी आर्थिक स्थिति बेहतर है। उनका यह प्रयास अब बरेली जिले के अन्य स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रेरणा बन गया है। सरकार महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को जीविका के साधन अपनाने के लिए सहायता की कई योजनाएं चला रही हैं।































