ब्लिट्ज ब्यूरो
आगरा। आगरा के आरबीएस कॉलेज कृषि संकाय बिचपुरी के शस्य विज्ञान विभाग के प्रोफेसर राजवीर सिंह के अनुसार आधुनिक कृषि तकनीकों का लक्ष्य कम संसाधनों में अधिक उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय में वृद्धि है। उन्होंने कहा कि खेती अब तकनीक आधारित उद्योग की ओर बढ़ रही है और पारंपरिक पद्धतियों को आधुनिक नवाचारों से जोड़ा जा रहा है। हाईटेक कृषि से किसानों का भविष्य बदल रहा है।
प्रो. सिंह ने कहा कि डिजिटल क्रांति में प्रिसीजन फार्मिंग (सटीक खेती) की भूमिका महत्वपूर्ण है। सेंसर और सैटेलाइट तकनीक से मृदा, मौसम और फसल विकास का सटीक डेटा मिलता है, जिससे उर्वरक और सिंचाई का उपयोग वास्तविक जरूरत के अनुसार हो पाता है। इससे लागत घटती है और उत्पादन बढ़ता है।
ड्रोन तकनीक से समय की बचत
प्रो. सिंह बताते हैं कि कृषि रोबोट मृदा नमूना संग्रह, बीज बुवाई, निराई-गुड़ाई, छंटाई, कटाई और कीटनाशक छिड़काव जैसे कार्य कर रहे हैं, जिससे जोखिम भरे कार्यों में मानव श्रम की आवश्यकता कम हुई है। वहीं, ड्रोन तकनीक से फसल सुरक्षा, पोषक तत्व प्रबंधन, रोग पहचान और सिंचाई में समय व संसाधनों की बचत हो रही है।
दूरदर्शी पहल है ड्रोन दीदी योजना
प्रो. राजवीर सिंह ने बताया कि नमो ड्रोन दीदी योजना ग्रामीण महिलाओं को तकनीक से जोड़ने की दूरदर्शी पहल है। इसके तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। योजना में ड्रोन की लागत पर 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी का प्रावधान है।
प्रो. राजवीर सिंह ने कहा कि कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के माध्यम से मौसम पूर्वानुमान, रोग-कीट पहचान और फसल प्रबंधन को अधिक सटीक बनाया जा रहा है।































