ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। युद्ध के बदलते स्वरूप के साथ ही अटैक वेपन भी एडवांस और ज्यादा घातक होते जा रहे हैं। खासकर हवाई हमलों का खतरा पहले के मुकाबले अब कई गुना बढ़ चुका है। फाइटर जेट, ड्रोन और हाइपरसोनिक रफ्तार वाली मिसाइलें किसी भी देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। बता दें कि हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी वाली मिसाइलें या अन्य वेपन मैक 5 (यानी 6000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार या उससे ज्यादा की स्पीड) या उससे ऊपर की रफ्तार से अटैक करते हैं, ऐसे में उससे बचाव के लिए कारगर डिफेंस सिस्टम डेवलप करना जरूरी हो गया है। भारत इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है।
डीआरडीओ नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल डिफेंस सिस्टम डेवलप करने में जुटा है, ताकि हाइपरसोनिक मिसाइल के वार को भी नाकाम किया जा सके।
मॉडर्न वॉरफेयर में जिस तरह से मिसाइल अटैक किए जा रहे हैं, उससे खुद को सुरक्षित रखना कतई आसान काम नहीं रह गया है। मिसाइल के भी एक से ज्यादा वर्जन डेवलप किए जा चुके हैं, जिन्हें सामान्य रडार सिस्टम से इंटरसेप्ट कर उन्हें न्यूट्रालाइज करना आसान काम नहीं रहा गया है। बैलिस्टिक मिसाइल के साथ ही क्रूज और मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल्स (एमआईआरवी) जैसी तकनीक से लैस मिसाइल्स डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौती बन चुके हैं। इन खतरों से देश को सुरक्षित रखना आसान काम नहीं है। खासकर हाइपरसोनिक मिसाइल्स (जिनकी रफ्तार 6000 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा) बड़ी चुनौती है। इस कैटेगरी की मिसाइलों की रफ्तार इतनी ज्यादा होती है कि इन्हें सामान्य रडार सिस्टम या एयर डिफेंस सिस्टम से इंटरसेप्ट करना आसान काम नहीं है। इसे देखते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन नया मिसाइल डिफेंस सिस्टम डेवलप कर रहा है, ताकि हाइपरसोनिक और एमआईआरवी एरियल थ्रेट को प्रभावी तरीके से निष्क्रिय किया जा सके। डीआरडीओ बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस के तहत ऐसे इंटरसेप्टर के डेवलपमेंट पर काम कर रहा है, जो हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल , हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल और एम आईआरवी जैसे अल्ट्रा मॉडर्न टेक्नोलॉजी से डेवलप थ्रेट से प्रभावी तरीके से निपट सके। डीआरडीओ खासकर हाइपरसोनिक खतरों से निपटने के लिए एडी-एएच और एडी-एएम इंटरसेप्टर डेवलप कर रहा है। दोनों अत्याधुनिक इंटरसेप्टर परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है। ये दोनों सिस्टम बीएमडी प्रोग्राम के प्रस्तावित फेज-III का आधार स्तंभ होंगे और खास तौर पर हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (एचजीवी), हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल और मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल्स जैसी उभरती खतरनाक खतरों से निपटने के लिए विकसित की जा रही हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा में तेजी से बदलाव आ रहा है। पड़ोसी देशों द्वारा हाइपरसोनिक हथियारों के विकास ने मिसाइल रक्षा प्रणालियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। मैक-5 से अधिक गति, अनिश्चित मार्ग और वायुमंडल के भीतर लंबी उड़ान प्रोफाइल वाले ये हथियार पारंपरिक एग्जो-एटमॉस्फेरिक इंटरसेप्टर्स को चकमा देने में सक्षम माने जाते हैं।
































