विनोद शील
नई दिल्ली। विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विगत दिवस नीति आयोग में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और प्रमुख अर्थशास्त्रियों तथा सेक्टोरल एक्सपर्ट्स के साथ बैठक की। मीटिंग का फोकस नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स, ग्रोथ ड्राइवर्स और टैरिफ के असर पर रहा। बैठक का मुख्य विषय ‘आत्मनिर्भरता और संरचनात्मक परिवर्तन: एजेंडा फॉर विकसित भारत’ था। पीएम ने कहा कि अब विकसित भारत का सपना सिर्फ सरकारी फाइल तक सीमित नहीं है बल्कि यह एक जनआकांक्षा बन चुका है।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लिए मजबूत संस्थान, इंफ्रास्ट्रक्चर और मिशन मोड में सुधार जरूरी हैं। अगर हमें अपनी आर्थिक वृद्धि की रफ्तार को लंबे समय तक बनाए रखना है तो हमें ‘मिशन-मोड’ में काम करना होगा। इसका मतलब है कि सुधारों को सिर्फ सरकारी आदेश की तरह नहीं बल्कि एक मिशन की तरह पूरा करना होगा। 2025 में देश ने जो अभूतपूर्व सुधार देखे हैं वे इसी दिशा में बढ़ाए गए कदम हैं। आने वाले साल में इन सुधारों को और भी ज्यादा मजबूत किया जाएगा ताकि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहे।
बैठक में मौजूद विशेषज्ञों ने उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक को अपनाने पर जोर दिया। एआई केवल तकनीक नहीं बल्कि हर क्षेत्र में काम की रफ्तार व क्वालिटी बढ़ाने वाला सबसे बड़ा कारक है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई)
भारत ने डिजिटल पेमेंट और डेटा शेयरिंग के क्षेत्र में जो सफलता पाई है, उसे और भी बड़े स्तर पर ले जाने की योजना है।
बदलती जरूरतों के लिए तैयार होगा भारत
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का समाज बदल रहा है। लोगों की पसंद, शिक्षा के तरीके और ग्लोबल मोबिलिटी (पूरी दुनिया में आने-जाने और काम करने की क्षमता) के रुझान बदल रहे हैं। इन बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए हमें अपने संस्थानों की क्षमता बढ़ानी होगी और बुनियादी ढांचे की ऐसी प्लानिंग करनी होगी जो भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सके।
वैश्विक कार्यबल का केंद्र बनेगा भारत
संवाद के दौरान इस बात पर भी बल दिया गया कि भारत को दुनिया के लिए ‘वर्कफोर्स’ (कार्यबल) का प्रमुख केंद्र बनना होगा। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ानी होगी। अर्थशास्त्रियों ने सुझाव दिया कि घरेलू बचत बढ़ाने और अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने से देश का आर्थिक ढांचा और भी मजबूत होगा। नीति आयोग की यह बैठक इस बात की गवाह है कि भारत अब छोटे लक्ष्य नहीं, बल्कि बहुत बड़े और दूरगामी लक्ष्य लेकर चल रहा है। प्रधानमंत्री का यह विजन कि बजट और नीतियां सीधे 2047 के लक्ष्य से जुड़ी होनी चाहिए; देश को एक नई दिशा देने वाला है। विशेषज्ञों और सरकार के बीच का यह तालमेल आने वाले समय में भारत के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा।
आगे क्या असर पड़ेगा
ये सुझाव विकसित भारत 2047 के लॉन्ग टर्म प्लान में मदद करेंगे। मैक्रोइकोनॉमिक स्टेबिलिटी मजबूत करने, इमर्जिंग चैलेंजेस से निपटने और सस्टेनेबल ग्रोथ पर फोकस रहेगा। बजट में जॉब्स, इन्वेस्टमेंट और सर्विस सेक्टर को बूस्ट देने वाली पॉलिसी आ सकती हैं।
मीटिंग में कौन-कौन शामिल हुए
मीटिंग में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण के अलावा नीति आयोग के वाइस चेयरमैन सुमन बेरी, सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम और अन्य मेंबर्स मौजूद थे। प्रमुख अर्थशास्त्री और अलग-अलग सेक्टर्स के एक्सपर्ट्स ने हिस्सा लिया। यह प्री-बजट कंसल्टेशन का हिस्सा था।
बजट पेश होने की तारीख
फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को यूनियन बजट 2026-27 पेश करेंगी। इस बजट में ग्लोबल अनिश्चितताओं और इकोनॉमिक चैलेंजेस को ध्यान में रखकर पॉलिसी बनाई जाएंगी। एक्सपर्ट्स के सुझाव बजट अनाउंसमेंट्स को शेप दे सकते हैं।
पहले भी कंसल्टेशन
इससे पहले सरकार ने एमएसएमई, कैपिटल मार्केट्स, स्टार्टअप्स, मैन्युफैक्चरिंग, बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज, आईटी, टूरिज्म जैसे सेक्टर्स से सुझाव लिए। ट्रेड यूनियंस और लेबर ग्रुप्स से भी बात हुई। पब्लिक से भी MyGov वेबसाइट पर सुझाव मांगे गए थे।
अर्थव्यवस्था के प्रमुख मुद्दों पर हुई बात
मीटिंग सुबह 11 बजे शुरू हुई और इसमें अर्थव्यवस्था के प्रमुख मुद्दों पर बातचीत हुई। घरेलू कंजम्प्शन, मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ, एक्सपोर्ट परफॉर्मेंस और टैरिफ से जुड़ी दिक्कतों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने भारत की ग्रोथ को आगे बढ़ाने के लिए अपने सुझाव और सिफारिशें प्रधानमंत्री के समक्ष रखीं।
वर्ल्ड क्लास कैपेबिलिटी व ग्लोबल
इंटीग्रेशन पर बात
पीएम मोदी ने बैठक में आत्मनिर्भरता और स्ट्रक्चरल ट्रांसफॉर्मेशन पर जोर दिया। चर्चा में वर्ल्ड क्लास कैपेबिलिटी बनाने और ग्लोबल इंटीग्रेशन पर बात हुई। एक्सपर्ट्स से सुझाव लिए गए कि 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जाएं। जॉब क्रिएशन और लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर भी फोकस रहा।































