सिंधु झा
भले ही हर साल देश में आबादी का एक छोटा सा हिस्सा ही हवाई यात्रा करता है, लेकिन हवाई यातायात में लगातार उछाल देखा जा रहा है। इसी के मद्देनजर अंतर्राष्ट्रीय वायु परिवहन संघ जून में नई दिल्ली में अपनी वार्षिक आम बैठक आयोजित करने जा रहा है, जो भारत के बढ़ते बाजार प्रभाव का एक ठोस संकेत है। अपनी अर्थव्यवस्था और मध्यम वर्ग के निरंतर विकास ने भारत और इसके 140 करोड़ लोगों को अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हवाई बाज़ार बना दिया है।
सबसे तेजी से बढ़ने वाला वाणिज्यिक विमानन बाजार जानकारों के मुताबिक भारत वैश्विक एयरोस्पेस का उभरता सितारा है जो दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाला वाणिज्यिक विमानन बाजार बन गया है और यह अगले 20 सालों तक ऐसा ही रहेगा, इसकी पूरी संभावना है।
अमेरिकी कंपनी बोइंग का मानना है कि भारत धरती पर सबसे गतिशील बाजार है और निश्चित रूप से सबसे रोमांचक भी। भारतीय नागरिक उड्डयन क्षेत्र की उड़ान योजना तीव्र विकास की ओर है। बोइंग के पूर्वानुमान के अनुसार, इस वृद्धि से दक्षिण एशिया, मुख्य रूप से भारत में यातायात में 2043 तक प्रति वर्ष 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होगी।
प्रति व्यक्ति हवाई यात्रा दर
भारत में प्रति व्यक्ति हवाई यात्रा दर मात्र 0.12 है, जबकि चीन में यह 0.46 है। भारतीय रेलवे अभी भी काफी लोकप्रिय है, लेकिन यूरोपीय संघ के लगभग तीन-चौथाई क्षेत्र वाले देश में रेलगाड़ियों से यात्रा करना अक्सर धीमा और अस्त-व्यस्त होता है। बोइंग का अनुमान है कि हवाई बाजार को दोगुना करने के लिए प्रतिदिन करीब दो करोड़ रेल यात्रियों में से लगभग 2 प्रतिशत को हवाई यात्रा पर आना होगा जबकि हवाई यात्रियों की संख्या महज 430,000 है।
हवाई क्षेत्र के विकास को लगातार प्राथमिकता
मालूम हो कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में सत्ता में आने के बाद से ही हवाई क्षेत्र के विकास को लगातार प्राथमिकता देते हुए देश के आम लोगों के लिए उड़ान योजना को अंजाम दिया। भारतीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दशक में हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी से भी अधिक हो गई है। 2014 में 74 से बढ़कर पिछले वर्ष 157 हो गई। वर्ष 2047 तक हवाई अड्डों की संख्या को 350 से 400 के बीच तक बढ़ाने की सरकार की योजना है।
30,000 पायलटों की भर्ती का प्लान
इसके साथ ही अगले 20 वर्षों में लगभग 30,000 पायलटों और कम से कम इतने ही मैकेनिकों को प्रशिक्षित करने के लिए कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। एयरबस और बोइंग इसमें प्रमुख साझेदार हैं, जिनका जोर महिलाओं को बढ़ावा देने पर है। विमान निर्माता कंपनियों का मानना है कि भारत में एयरलाइन क्षेत्र में अगली छलांग अंतर्राष्ट्रीय होगी। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय घरेलू बाजार में जिस तरह की क्रांति दिखी है, वही क्रांति अब लंबी दूरी के बाजार में भी हो रही है। मसलन एयरबस भारत के स्थानीय लाभ, जनसांख्यिकीय लाभांश और आर्थिक विकास का लाभ उठा रहा है। बोइंग को लंबी दूरी की उड़ान में सक्षम बड़े विमानों के लिए और अधिक ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। कंपनी का मानना है कि अगले 20 वर्षों में भारत के कुल बेड़े का 15 प्रतिशत हो जाएगा। इस समय-सीमा तक भारतीय बाजार को कम से कम 2,835 नए विमानों की आवश्यकता होगी, तीन-चौथाई बाजार वृद्धि के लिए तथा शेष प्रतिस्थापन के लिए।





















