ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत की एयरोस्पेस ताकत तेजी से बढ़ रही है। इसकी एक झलक बेंगलुरु में दिखी जहां सीएसआईआर नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेट्रीज (एनएएल) ने हंसा-3 न्यू जेनरेशन के पहले सीरीज प्रोडक्शन वेरिएंट को लॉन्च किया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह मौजूद थे जिन्होंने इसे भारत की आत्मनिर्भर उड़ान का नया मील का पत्थर बताया।
पूरी तरह भारत में बना है
हंसा-एनजी को मुंबई की प्राइवेट कंपनी पायनियर क्लीन एएमपीएस प्राइवेट लिमिटेड ने पूरी तरह भारत में बनाया है। खास बात ये है कि कंपनी ने एनएएल से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर मिलने के सिर्फ छह महीने में पहला प्रोडक्शन एयरक्राफ्ट तैयार कर दिया। भारतीय एविएशन में इतनी तेज गति से किसी विमान का औद्योगिक उत्पादन शुरू होना दुर्लभ माना जाता है।
प्राइवेट सेक्टर की साझेदारी
डॉ सिंह ने कहा कि ये मॉडल पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर की साझेदारी की एक मिसाल है। हंसा-एनजी अभी देश का ऐसा एकमात्र बेसिक ट्रेनर है जिसे डीजीसीए से डिजाइन ओर्गेनाइजेशन एप्रूवल और प्रोडक्शन ओर्गेनाइजेशन एप्रूवल, दोनों मिले हुए हैं। ये दो-सीटर, पूरी तरह कॉम्पोज़िट स्ट्रक्चर वाला ट्रेनर 120 एचपी रोटेक्स 912 आईएससी इंजन से चलता है। ग्लास कॉकपिट के साथ आता है। ऑपरेटिंग कॉस्ट भी सिर्फ लगभग 2500 रुपये प्रति घंटा है जिससे उड़ान क्लबों और ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशंस के लिए ये काफी किफायती विकल्प बन जाता है।
एयरक्राफ्ट को 2024 में सर्टिफाई किया था
एनएएल ने इस एयरक्राफ्ट को 2024 में सर्टिफाई किया था। तब से यह 500 घंटे से ज्यादा बिना किसी हादसे के उड़ान पूरी कर चुका है। इसके बाद पायनियर क्लीन एएमपीएस ने भारी निवेश कर मुंबई में एक नई असेंबली लाइन लगाई 150 से ज्यादा टेक्नीशियन ट्रेन किए और पहला एयरफ्रेम रिकॉर्ड समय में तैयार कर दिया। कंपनी अब पांच और एयरक्राफ्ट पर काम शुरू कर चुकी है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के फ्लाइंग स्कूलों से 30 यूनिट्स के पक्के ऑर्डर मिल चुके हैं।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने बताया कि 2027 तक 50 हंसा-एनजी एयरक्राफ्ट बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका के देशों के लिए एक एक्सपोर्ट वर्जन पर भी काम चल रहा है। नौसेना के लिए एक स्पेशल वेरिएंट भी डिजाइन किया जा रहा है। जिसमें मरीन वातावरण के लिए जरूरी बदलाव होंगे। हंसा-एनजी का प्रोडक्शन भारतीय एविएशन सेक्टर में न सिर्फ निजी उद्योग की बढ़ती भूमिका को दिखाता है बल्कि ये भी साफ करता है कि आत्मनिर्भर भारत अब हवा में भी तेजी से उड़ान भरने लगा है।































