गुलशन वर्मा
नई दिल्ली। निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट-2026 में भारत ने बांग्लादेश के विकास पर बड़ा बुलडोजर चलाया है। हर साल पड़ोसी देशों को जारी होने वाले बजट में संशोधन से बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था बिलकुल अपाहिज हो जाएगी। भारत का एक एक्शन यूनुस सरकार को कई विकास योजनाओं में लगभग अपंग बना देगा। इसकी प्रमुख वजह है कि बांग्लादेश में भारत द्वारा जारी बजट से अब तक सैकड़ों प्रमुख विकास योजनाएं संचालित हो रही थीं, मगर यूनुस सरकार के रवैये के चलते इस बार के बजट में भारत ने बांग्लादेश की मदद से हाथ खींचते हुए उसके बजट को आधा कर दिया है।
यूनुस सरकार को भारत ने बजट से दिया बड़ा सदमा
भारत ने इस बार केंद्रीय बजट से बांग्लादेश की यूनुस सरकार को बहुत बड़ा झटका दिया है। बांग्लादेश को इस बार भारत की विदेशी सहायता में सबसे तेज कटौती का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि बांग्लादेश के लिए जारी होने वाले बजट का आवंटन मोदी सरकार ने इस बार 120 करोड़ रुपये से घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दिया है। वहीं अधिकांश अन्य पड़ोसी देशों को दी जाने वाली सहायता को बनाए रखा गया है या उसे बढ़ाया गया है। भारत ने यह कदम बांग्लादेश के साथ चल रहे तनावपूर्ण संबंधों और हिंदुओं व अल्पसंख्यकों पर जारी हमलों का सबक सिखाने के लिए उठाया है।
भारत ने अपने केंद्रीय बजट 2026-27 में अपनी विदेशी विकास सहायता को काफी हद तक संशोधित किया है। भारत ने बांग्लादेश में लगातार बढ़ती हिंदू-विरोधी घटनाओं और हत्याओं की घटनाएं सामने आने के बाद कठोर कदम उठाया है। लिहाजा बांग्लादेश को भारत की ओर से दी जाने वाली विदेशी सहायता में सबसे तेज कटौती करतेे हुए इसका आवंटन पहले से आधा कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर भारत के साथ अच्छे संबंध रखने वाले अन्य पड़ोसी देशों को दी जाने वाली मदद को बरकरार रखा गया है।
1 साल पहले किया था 120 करोड़ का आवंटन
दस्तावेजों में यह भी खुलासा हुआ कि भारत ने बांग्लादेश के लिए गत वित्तीय वर्ष में 120 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, लेकिन तनावपूर्ण संबंधों के कारण इसमें से केवल 34.48 करोड़ रुपये की धनराशि ही खर्च की गई है। जबकि भूटान उन देशों की सूची में सबसे ऊपर बना हुआ है जो भारत से सहायता प्राप्त करने में आगे है। इसके बाद नेपाल, मालदीव और श्रीलंका हैं। इन “देशों को सहायता” के तहत आवंटन को बढ़ाकर 5,686 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
































