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यह मणिपुर के घाव भरने का समय है, दोषारोपण और बयानबाजी का नहीं

हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी समुदायों के बीच स्थायी शांति और सद्भाव को बहाल करना है

by Blitz India Media
May 23, 2026
in Hindi Edition
0
घाव भरने और शांति बहाली का समय: सीएम युमनाम खेमचंद सिंह

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।मेरा आग्रह है कि अब मणिपुर को सुर्खियों से आगे देखिए। देखिए कि भाजपा सरकार ने इस पर कैसी प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में, हमने इस संकट को स्थायी गतिरोध नहीं बनने दिया है। हमने अपनी ऊर्जा पुनर्वास और मेल-मिलाप में लगाई है।

पिछले तीन वर्षों की उथल-पुथल ने राज्य की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया है। हमारी सरकार केंद्र के सहयोग से राज्य की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास करेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह का कहना है कि यह वक्त सूबे के घाव भरने का है। उनका दावा है कि भाजपा की अगुआई वाली केंद्र सरकार ने मणिपुर को कभी भी अकेला नहीं छोड़ा। सिंह के मुताबिक मुख्यमंत्री के रूप में उनकी पहली प्राथमिकता उस दरार को भरना है, जो पिछले तीन वर्षों में आई है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में, और विशेष रूप से मणिपुर में, भाजपा की राजनीतिक सफलता कोई ऐतिहासिक संयोग नहीं थी। यह लोगों की आकांक्षाओं की पूर्ति और सुशासन पर आधारित एक ढांचागत बदलाव है। सिंह ने कहा कि पिछले तीन वर्षों की उथल-पुथल ने राज्य की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया है और उनकी सरकार केंद्र के सहयोग से इस स्थिति को ठीक करने की राह पर है। पूर्वोत्तर के इस महत्त्वपूर्ण और संवेदनशील प्रदेश के मुख्यमंत्री से मीडिया के सवाल और उनके जवाब।

आपको मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी ऐसे समय में मिली है, जब राज्य कठिन दौर से गुजर रहा है। सच तो यह है कि मणिपुर लंबे समय से कई तरह की मुश्किले झेल रहा है। अशांति का लंबा दौर रहा है। राज्य प्रमुख के रूप में आप अपने सामने किस तरह की चुनौतियां देखते हैं?

• वास्तव में, हमारे राज्य के इतिहास में यह एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील दौर है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और अन्य केंद्रीय नेताओं द्वारा मुझे सौंपी गई जिम्मेदारी से मैं अभिभूत हूं। हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी समुदायों के बीच स्थायी शांति और सद्भाव को बहाल करना है। हमारी तात्कालिक प्राथमिकता हर नागरिक की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करना है। फिर चाहे उसकी जातीयता, धर्म या जनजाति कुछ भी हो। साथ ही उस विश्वास को फिर से कायम करना है, जिसमें पिछले लगभग तीन वर्षों से दरार आ गई है। मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि यह दोषारोपण या बयानबाजी का समय नहीं है। यह घावों को भरने का, धैर्यपूर्ण और निरंतर प्रयासों का और मणिपुर के हर व्यक्ति की गरिमा को बनाए रखने का समय है। हमारे प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत सरकार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि मणिपुर की जनता के सहयोग से, मुझे विश्वास है कि हम और भी अधिक मजबूत तथा एकजुट होकर उभरेंगे।

केंद्र सरकार पर मणिपुर की उपेक्षा करने का आरोप लगता रहा है। इस सूबे से जुड़ी कई हस्तियों ने भी केंद्र के रवैए पर सवाल उठाए थे, चाहे वे फिल्म से जुड़ी रही हो या खेल से। आरोप है कि केंद्र ने उन्हें अकेला छोड़ दिया। क्या आप उम्मीद कर रहे हैं कि एक मुख्यमंत्री के तौर पर आपको केंद्र से समुचित सहयोग मिलेगा ?

• मेरा जवाब स्पष्ट और दो-टूक है-हां। और, वे ऐसा पहले ही कर चुके हैं। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में, केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर के कल्याण, सुरक्षा और विकास को लगातार प्राथमिकता दी है। मणिपुर भी इससे अभी अछूता नहीं रहा है। केंद्रीय मंत्रियों के लगातार दौरों से लेकर गृह मंत्रालय द्वारा सीधे तौर पर दिए गए सहयोग तक, हमें जो मदद मिली है, वह समय पर, सच्ची और काफी अहम रही है। मोदी जी का मौजूदा स्थिति पर व्यक्तिगत ध्यान, उनकी संवेदनशीलता, शांति की उनकी प्रार्थना और उनका यह आश्वासन। मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

मणिपुर में भी विधानसभा चुनाव होंगे। पांच साल के घटनाक्रम के तहत इस बार का चुनाव ज्यादा अहम दिख रहा है। राज्य के मुख्य चुनावी मुद्दे के बारे में आपका क्या आकलन है?

•प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की संवेदनशीलता और निर्णायक नेतृत्व वाली भाजपा-नीत सरकार ही है, जिसने मणिपुर की जनता के साथ हर कदम पर साथ दिया है। मुझे विश्वास है कि जनता इस सरकार पर अपना भरोसा फिर से जताएगी, क्योंकि अब विकास केवल एक वादा नहीं, बल्कि एक जीती-जागती हकीकत है।

लोकसभा से लेकर राज्यसभा तक के चुनावों में देखा गया है कि सत्तारूढ़ शक्तियां अपने वादों-इरादों के लिए सरकारी खजाने खोल देती है। विपक्ष भी कथित मुफ्त की रेवड़ी के सहारे ही सत्ता पाना चाहता है। इस रेवड़ी संस्कृति पर अदालतों में भी सवाल उठ चुके है। जब आप चुनाव में उतरेंगे तो क्या आपके पास ऐसी कोई योजना है जो आम आदमी के लिए फायदेमंद दिखेगी?

• पिछले तीन वर्षों की उथल-पुथल ने राज्य की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया है। हमारी सरकार केंद्र के सहयोग से राज्य की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास करेगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले ही हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।

चुनाव में नारों का अपना महत्व है। जैसे अभी हुए विधानसभा चुनाव में बंगाल के संदर्भ में भाजपा का नारा था-चार मई, दीदी गई। आगामी विधानसभा चुनाव में आपका मुख्य नारा क्या होगा ?

• सही समय आने पर हमारी पार्टी अपना मुख्य नारा तय कर लेगी।
इन दिनों दोहरे इंजन की सरकार को राज्य के विकास का मुख्य आधार बनाया जा रहा है। आप केंद्र सरकार से किस तरह की मदद की उम्मीद कर रहे हैं?

2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने पूर्वोत्तर भारत, विशेष रूप से मणिपुर पर विशेष ध्यान दिया है। मोदी जी ने भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को ‘भारत का विकास इंजन’ और ‘अष्टलक्ष्मी’ कहकर संबोधित किया था। उन्होंने इस क्षेत्र को विकास और प्रगति के केंद्र के रूप में मान्यता दी, जिससे यह क्षेत्र राष्ट्रीय प्रगति में केवल एक ‘सीमांत क्षेत्र’ होने से आगे बढ़कर ‘अग्रणी’ बन गया है। भारत की स्वतंत्रता के पश्चात विभिन्न सरकारों द्वारा इस क्षेत्र की उपेक्षा की जाती रही है। मणिपुर की जनता प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के साथ खड़ी रही है, क्योंकि वे ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ की दृष्टि में विश्वास रखते हैं। उन्होंने सबसे मुश्किल समय में भी इस सरकार पर अपना भरोसा जताया है। केंद्र सरकार मणिपुर के हर क्षेत्र के विकास के लिए और वहां की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।

भाजपा को पूर्वोत्तर में अभूतपूर्व राजनीतिक सफलता मिली है। एक तरह से कहा जाए तो पूर्वोत्तर की राजनीति का मैदान भाजपा की वैचारिकी के गढ़ बन चुके हैं। पूर्वोत्तर की सफलता सत्ता परिवर्तन का संयोग भर है या यहां कोई ढांचागत बदलाव किया गया है? क्या आप आगामी चुनाव में भी पहले जैसी सफलता की उम्मीद कर रहे है?

• सफलता पिछली चुनावी संख्याओं की महज पुनरावृत्ति नहीं होगी। बल्कि, यह एक ‘नए मणिपुर’ का स्वाभाविक परिणाम होगी। एक ऐसा मणिपुर जो संघर्ष की राख से उठ खड़ा हो रहा है, और जिसे केंद्र सरकार तथा राज्य तंत्र के ‘दोहरे इंजन’ की शक्ति प्राप्त है। मई 2023 से मणिपुर को जातीय हिंसा के एक दुखद दौर का सामना करना पड़ा है। हमने कई कीमती जानें गवाई हैं, और हमारे 60000 से अधिक नागरिक विस्थापित हुए हैं। स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। मेरा आग्रह है कि अब मणिपुर को सुर्खियों से आगे देखिए। देखिए कि भाजपा सरकार ने इस पर कैसी प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, हमने इस संकट को स्थायी गतिरोध नहीं बनने दिया है। इसके बजाय, हमने अपनी ऊर्जा पुनर्वास और मेल-मिलाप की दिशा में लगाई है। आंतरिक रूप से विस्थापित 10000 लोगों को पहले ही पुनस्र्थापित किया जा चुका है। मैंने व्यक्तिगत रूप से मणिपुर के अलग-अलग जिलों में मैतेई और कुकी-जो, दोनों समुदायों के गांवों का दौरा किया है और जमीनी स्तर पर सीधी बातचीत की है। मुझे पूरा विश्वास है कि सामूहिक प्रयासों, आपसी समझ और शांति व मेल-मिलाप के प्रति अटूट प्रतिवद्धता के माध्यम से, हम सब मिलकर इस चुनौतिपूर्ण दौर का सामना करने में कामयाब होंगे। पूर्वोत्तर में, और विशेष रूप से मणिपुर में, भाजपा की सफलता कोई ऐतिहासिक संयोग नहीं थी। यह लोगों की आकांक्षाओं की पूर्ति और सुशासन पर आधारित एक ढांचागत बदलाव है। अगर हम पूरी ईमानदारी से लोगों की सेवा करते रहेंगे, 2027 का जनादेश एक बार फिर विकास की राजनीति के पक्ष में होगा, न कि विभाजन की राजनीति के।

बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की शुरुआत हुई और यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना। बंगाल में एसआइआर की प्रक्रिया के कारण लाखों मतदाता बोट देने से वंचित रह गए। क्या आप एसआइआर की प्रक्रिया से खुश है?

• एसआइआर राजनीतिक मुद्दा नहीं है। यह देश के प्रत्येक नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से संबंधित है। इस सिद्धांत पर मैं दृढ़तापूर्वक कायम हूं। भारत का केंद्रीय चुनाव आयोग सभी हितधारकों के साथ संवाद कर रहा है। मैं इस बात को लेकर संतुष्ट हूं कि भारत सरकार स्वच्छ निर्वाचक नामावली के प्रति प्रतिबद्ध है।

मणिपुर में कांग्रेस की क्या स्थिति है? कितना बड़ा खतरा है यह भाजपा के लिए?
• मणिपुर में आज कांग्रेस पार्टी अपनी प्रासंगिकता तलाश रही है। वह भाजपा के लिए खतरा कैसे हो सकती है? मणिपुर में कांग्रेस भाजपा के लिए कोई महत्त्वपूर्ण चुनावी खतरा नहीं है। हम 2027 के चुनावों का आत्मविश्वास के साथ सामना करेंगे। मणिपुर में भाजपा का कार्य स्वयं बोलता है। हमें कांग्रेस पर आक्रमण करने की आवश्यकता नहीं है। मणिपुर में कांग्रेस अब कोई मुद्दा नहीं रही।

प्रधानमंत्री पर यह आक्षेप लगता रहा कि जब मणिपुर जल रहा था तो वहां नहीं गए। सूबे में अभी कैसी स्थिति है? देश में ज्यादातर चुनाव प्रधानमंत्री केंद्रित रहते हैं। इस संदर्भ में मणिपुर में कैसी स्थिति रहेगी ?

• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का हृदय सदैव मणिपुर के साथ रहा है। उनके कार्यों ने इसे सिद्ध किया है। शांति के प्रति उनकी प्रतिवद्धता अटूट बनी हुई है। अशांति के सबसे कठिन चरणों के दौरान भी प्रधानमंत्री राज्य सरकार के साथ निरंतर संवाद में रहे हैं। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से स्थिति की समीक्षा की है, तत्काल राहत के लिए निर्देश जारी किए हैं और यह सुनिश्चित किया है कि केंद्र के समस्त संसाधन मणिपुर के लिए उपलब्ध कराए जाएं।
प्रधानमंत्री ने चुराचांदपुर और इंफल की अपनी यात्रा के दौरान 8500 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी। ये ऐसी परियोजनाएं हैं जो आजीविका के अवसर पैदा करेंगी। उन्होंने हिंसा से प्रभावित पीड़ितों से भी मुलाकात की। लेकिन यह कहना कि प्रधानमंत्री अनुपस्थित रहे, तथ्यों के लिहाज से गलत है।

युमनाम खेमचंद सिंह क्यों
2014 में केंद्र में सत्ता स्थापित करने के बाद पूर्वोत्तर के राज्यों में भाजपा को बड़ी राजनीतिक सफलताएं मिली है। इसी कड़ी में भाजपा के लिए मणिपुर सिर्फ एक राज्य नहीं बल्कि पूरे पूर्वोत्तर की राजनीति का हिस्सा है। 2023-25 के दौरान मणिपुर में जातीय हिंसा ने ऐसा रूप धरा कि कुछ समय के लिए इसका केंद्र से नाता टूटता सा दिखा। इसी स्थिति को ठीक करने के लिए सूबे की कमान युमनाम खेमचंद सिंह को सौंपी गई है। पूर्वोत्तर की जमीन पर भाजपा को स्थायी आधार मिलने में खेमचंद सिंह जैसे जमीनी नेताओं का बड़ा हाथ है। सिंह की सांगठनिक और प्रशासनिक क्षमता पर भाजपा को भरोसा है। मणिपुर जब आजादी के बाद के इतिहास की सबसे गंभीर समस्या से जूझ रहा है तो इस अबूझ सी स्थिति को समझने के लिए सिंह से बेहतर कौन होता?
– जनसत्ता के सौजन्य से

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