ब्लिट्ज ब्यूरो
मुंबई। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अपनी चार दिवसीय भारत दौरे की शुरुआत मुंबई से की। इस दौरे का उद्देश्य 2023 के राजनयिक विवाद के बाद भारत-कनाडा संबंधों को पुनर्स्थापित करना था। मार्क कार्नी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर भारत की आर्थिक प्रगति की प्रशंसा की। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है।
हम ऐसी साझेदारियां बनाएंगे जो कनाडाई श्रमिकों और व्यवसायों के लिए नए अवसर खोलेंगी। विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा कि यह यात्रा भारत-कनाडा द्विपक्षीय संबंधों के सामान्यीकरण के महत्वपूर्ण चरण में हुई। दोनों नेताओं ने जून और नवंबर में कानानास्किस और जोहान्सबर्ग में हुई पिछली बैठकों के आधार पर रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘ये दौरा भारत-कनाडा द्विपक्षीय संबंधों के सामान्यीकरण के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है।’
भारत-कनाडा के रिश्तों में सुधार
हालांकि, पिछले साल अप्रैल में हुए संसदीय चुनाव में लिबरल पार्टी के नेता कार्नी की जीत ने संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की प्रक्रिया शुरू करने में मदद की और पिछले कुछ महीनों में भारत और कनाडा ने संबंधों को सामान्य बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की राजधानियों में अपने उच्चायुक्तों को तैनात कर दिया है। पिछले साल जून में पीएम मोदी जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए कनाडा के कनानास्किस द्वीप समूह गए थे, जहां पीएम मोदी और कार्नी ने शिखर सम्मेलन के दौरान संबंधों को फिर से मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए व्यापक बातचीत की।
टैलेंट और इनोवेशन स्ट्रेटेजी की लॉन्च
कनाडाई पीएम ने मुंबई में इनोवेशन शोकेस में हिस्सा लिया। वह यूनिवर्सिटी रिसर्चर्स से भी मिले। उनके दौरे के साथ ही, भारत और कनाडा ने एक टैलेंट और इनोवेशन स्ट्रेटेजी लॉन्च की, जिसमें शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि भारत कनाडा के साथ मिलकर दुनिया भर में कॉम्पिटिटिव टैलेंट बनाने, रिसर्च में सहयोग बढ़ाने और स्किल्स मोबिलिटी को मजबूत करने के लिए तैयार है। कनाडा में भारत के पूर्व हाई कमिश्नर अजय बिसारिया ने देश के हालिया आकलन को, जिसमें कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को फिर से बनाने के लिए ‘सितारे एक साथ’ हैं।
जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण थे।
एक इंटरव्यू में बिसारिया ने कहा कि यह बदलाव सुरक्षा मुद्दों को समझदारी से संभालने की एक ठोस कोशिश को दिखाता है, बिना उन्हें बड़ी राजनीतिक और आर्थिक साझेदारी को पटरी से उतरने दिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि कार्नी का इंडिया विजिट बदलते ग्लोबल गठबंधनों के बीच रिश्तों में शांत रीसेट का संकेत देता है।
कार्नी का इंडिया विजिट, ग्लोबल जियोपॉलिटिकल बदलावों और यूएस पॉलिसी से जुड़े व्यापार में रुकावटों के बीच पार्टनरशिप को फिर से ठीक करने की दोनों देशों की बड़ी कोशिश के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार
कार्नी ने अनिश्चित दुनिया में एक साथ काम करने वाली “मिडिल पावर्स” की भूमिका पर ज़ोर दिया है, और भारत तक कनाडा की पहुंच उसकी इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी और यूनाइटेड स्टेट्स पर आर्थिक निर्भरता कम करने की कोशिशों का हिस्सा है।













