ब्लिट्ज ब्यूरो
– आर्टेमिस 2 मून मिशन की सफलता के बाद अब नासा अगले मिशन आर्टेमिस 3 और आर्टेमिस 4 लॉन्च की तैयारी में जुट गया है।
आर्टेमिस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल चांद तक पहुंचना नहीं है। नासा वहां पर लंबे समय तक मानव उपस्थिति स्थापित करना चाहता है।
करीब आधी सदी के इंतजार के बाद इंसान दोबारा चांद की सतह पर कदम रखने की तैयारी कर रहा है। चंद्रमा पर मानव वापसी की दिशा में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा तेजी से आगे बढ़ रहा है। आर्टेमिस 2 मून मिशन की सफलता के बाद अब नासा अगले मिशन आर्टेमिस 3 और आर्टेमिस 4 लॉन्च की तैयारी में जुट गया है। हाल ही में सफलतापूर्वक पूरे हुए आर्टेमिस 2 मिशन के बाद अब एजेंसी का फोकस अगले मिशनों पर है जिसमें चंद्रमा की सतह पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारना शामिल है।
यह मिशन कई मायनों में ऐतिहासिक होने की बात कही जा रही है। इस मिशन के अंतर्गत पहली बार एक महिला और एक अश्वेत अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजा जाएगा। यह न सिर्फ एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि है, बल्कि अंतरिक्ष अन्वेषण में विविधता और समावेशन का भी प्रतीक बनेगा। इस मिशन के अंतर्गत एस्ट्रोनॉट को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाएगा। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अभी तक कोई मानव नहीं पहुंचा है।
इससे पहले आर्टेमिस 2 मिशन इसी माह में सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा की परिक्रमा की लेकिन वे सतह पर नहीं उतरे। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य तकनीकी परीक्षण और मानवयुक्त उड़ान की तैयारी को जांचना था ताकि आगे आने वाले मिशन सुरक्षित और सफल हो सकें।
आर्टेमिस 2 की सफलता के बाद अब आर्टेमिस 3 को लेकर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। यह मिशन 50 साल बाद चांद पर मानव लैंडिंग कराएगा। अंतिम बार साल 1972 में अपोलो मिशन के दौरान इंसान ने चांद पर कदम रखा था। इस बार खास बात यह है कि लैंडिंग चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर होगी जहां पानी की बर्फ मिलने की संभावना है। यह भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

मकसद है चांद पर इंसान को बसाना
आर्टेमिस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल चांद तक पहुंचना नहीं है। नासा वहां पर लंबे समय तक मानव उपस्थिति स्थापित करना चाहता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि चांद पर बेस बनाकर भविष्य में मंगल ग्रह की यात्रा को आसान बनाया जा सकता है। इस मिशन की मदद से नई तकनीकों का परीक्षण किया जाएगा, जो सुदूर अंतरिक्ष में मानव मिशनों के लिए जरूरी हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो आर्टेमिस-3 मिशन अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक बड़ा मोड़ साबित होने वाला है। इससे न केवल अंतरिक्ष अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी, बल्कि वैश्विक सहयोग भी बढ़ेगा। आने वाले वर्षों में यह मिशन मानवता के अंतरिक्ष भविष्य को तय करने में एक महत्वपूर्म भूमिका निभाने वाला है।
हर साल एक चंद्र मिशन लॉन्च करने की योजना
नासा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया, अब आर्टेमिस 2 क्रू घर लौट आया है तो हमारे आर्टेमिस प्रोग्राम के लिए आगे क्या है? पूरी दुनिया ने इसे देखा। आर्टेमिस 2 ने इंसानों को अंतरिक्ष में इतनी दूर तक पहुंचाया, जहां हम पिछले आधेीसदी से भी ज्यादा समय में कभी नहीं पहुंचे थे और इसने नई पीढ़ी को दिखाया कि खोज-यात्रा कैसी होती है। चांद पर वापसी की यात्रा जारी है। अब बारी है आर्टेमिस 3 की। हम हर साल आर्टेमिस मिशन लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं। आर्टेमिस 3 मिशन 2027 के मध्य में लॉन्च होकर स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन के लैंडर्स की डॉकिंग और प्रणालियों का परीक्षण करेगा। वहीं आर्टेमिस 4 मिशन के अंतर्गत इंसान को 2028 में चंद्रमा की सतह पर उतारा जा सकता है।
आर्टेमिस 5 में चंद्रमा पर स्थायी बेस संभव
आर्टेमिस 5 मिशन में एसएलएस रॉकेट के साथ दूसरे चरण के लिए नए विकल्पों का मूल्यांकन किया जा रहा है। नासा एसएलएस रॉकेट और ओरियन स्पेसक्राफ्ट की क्षमताओं को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। आर्टेमिस 4 के बाद आर्टेमिस 5 में चंद्रमा पर स्थायी बेस कैंप बनाने की शुरुआत हो सकती है। एजेंसी का लक्ष्य है कि 2028 के अंत तक नियमित रूप से चंद्रमा मिशन भेजे जाएं।













