ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते में ‘अंड़गा’ आ रहा है। जब डील पर बात लगभग पूरी होने की चर्चा तेज थी कि तभी अचानक एक पुराना और संवेदनशील मुद्दा फिर से सामने आ गया। दो प्रभावशाली रिपब्लिकन सीनेटरों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चिट्ठी लिखी है। इसमें भारत से अमेरिकी दालों पर लगे टैक्स को हटाने के लिए दबाव बनाने को कहा है। यह मांग भले ही छोटी लगे लेकिन, यह भारत की कृषि से जुड़ी अहम नीतियों और दालों में आत्मनिर्भर बनने की उसकी बड़ी कोशिशों पर सीधा असर डालती है। इससे पहले से ही मुश्किल चल रही बातचीत में एक नई उलझन पैदा हो गई है। डर ये है कि कहीं इसके कारण डील पर हुई अब तक की प्रगति पर पानी तो नहीं फिर जाएगा।
अमेरिकी दाल उद्योग की शिकायत
अमेरिका के मोंटाना और नॉर्थ डकोटा राज्यों के सीनेटर स्टीव डेन्स और केविन क्रेमर ने भारत के दालों पर लगाए टैक्स को ‘अनुचित’ और अमेरिकी किसानों के लिए नुकसानदायक बताया है। ये अमेरिका के सबसे बड़े दाल उत्पादक राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने 16 जनवरी को राष्ट्रपति ट्रंप को लिखे अपने पत्र में कहा कि भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है।
वैश्विक खपत में उसकी हिस्सेदारी लगभग 27% है। उनका तर्क है कि भारत के ऊंचे टैक्स अमेरिकी उत्पादकों को इस बड़े बाजार तक पहुंचने से रोकते हैं।
सीनेटरों की मुख्य चिंता
पिछले साल अक्टूबर में भारत की ओर से पीली मटर पर 30% टैक्स लगाने की घोषणा है। यह 1 नवंबर, 2025 से लागू है। सीनेटरों के अनुसार, ऐसे कदम अमेरिकी निर्यातकों को काफी नुकसानदायक स्थिति में डाल देते हैं। फिर भले ही अमेरिकी उत्पाद अच्छी क्वालिटी वाले हों। उन्होंने ट्रंप से अपील की कि भारत के साथ किसी भी भविष्य के व्यापार समझौते में दालों को प्रमुख मुद्दा बनाया जाए।
























