ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत ने आत्मनिर्भरता का एक और कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने लड़ाकू विमान के लिए बनाई गई ‘इजेक्शन सीट’ यानी पायलट की जान बचाने वाली इमरजेंसी निकासी प्रणाली का बहुत तेज गति वाला रॉकेट-स्लेड टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अब भारत को विदेशी कंपनियों से महंगी इजेक्शन सीट खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
क्या हुआ इस टेस्ट में?
चंडीगढ़ के टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैबोरेटरी में बनी रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड सुविधा पर यह परीक्षण किया गया। तेजस (एलसीए) विमान के आगे के हिस्से को दो रॉकेट स्लेड पर रखा गया।
कई ठोस ईंन्धन वाले रॉकेट मोटर्स को एक-एक करके जलाया गया, जिससे स्लेड बहुत सटीक और नियंत्रित तेज गति तक पहुंचा।
विमान का कॉकपिट कैनोपी (ऊपर का शीशा) सही तरीके से टूटा।
इजेक्शन सीट ने सही समय पर पायलट डमी को बाहर फेंका।
पैराशूट खुला और सुरक्षित जमीन पर उतरा।
पूरी प्रक्रिया में जो जोर, दबाव और तेजी पायलट पर पड़ती है। वह सब एक खास डमी पर रिकॉर्ड किया गया। हाई-स्पीड कैमरों से हर सेकेंड का वीडियो लिया गया।
यह टेस्ट क्यों बहुत खास है?
दुनिया में सिर्फ कुछ ही देश (अमेरिका, रूस, फ्रांस) अपने यहां इतनी तेज गति वाला डायनामिक इजेक्शन टेस्ट कर सकते हैं। अब भारत भी इस चुनिंदा क्लब में शामिल हो गया है। यह टेस्ट स्थिर टेस्टों (जैसे नेट टेस्ट या जीरो जीरो टेस्ट) से कहीं ज्यादा मुश्किल और सटीक होता है। असली उड़ान की स्थिति में पायलट की जान बचाने की पूरी गारंटी यही टेस्ट देता है।
डीआरडीओ की टीम
एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए)
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल)
भारतीय वायुसेना के अधिकारी
इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन के विशेषज्ञ रक्षा मंत्री और डीआरडीओ चेयरमैन ने दी बधाई।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता के लिए बहुत बड़ा मील का पत्थर है। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और मजबूत कदम। डीआरडीओ, वायुसेना, एडीए, एचएएल और उद्योग को बधाई। डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. समीर वी कामत ने भी पूरी टीम को शाबासी दी और कहा कि यह तेजस और आने वाले एएमसीए जैसे लड़ाकू विमानों के लिए बहुत जरूरी सफलता है।
इसका मतलब क्या है?
अब भारत को विदेशी कंपनियों से महंगी इजेक्शन सीट खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। तेजस मार्क-1ए, मार्क-2 और भविष्य के 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान पूरी तरह स्वदेशी इजेक्शन सिस्टम के साथ उड़ेंगे। पायलटों की सुरक्षा और मजबूत होगी।































