विनोद शील
नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव (युद्ध) के बीच इसी साल (2026) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संभावित रूस दौरा भारत की ‘संतुलित और स्वतंत्र कूटनीति’ को दर्शाता है। यह रूस के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने, युद्ध विराम के लिए मध्यस्थता करने और वैश्विक दबाव के बावजूद रूस से दोस्ती बनाए रखने का सशक्त कूटनीतिक संदेश भी है।
कुल मिलाकर पीएम मोदी का यह कदम संकट के समय में भारत की ऊर्जा, सुरक्षा और रक्षा हितों की रक्षा करने वाली एक ‘साहसी और स्वतंत्र कूटनीति’ को भी रेखांकित करता है।
प्रधानमंत्री मोदी के रूस दौरे की जानकारी खुद रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने दी है। उन्होंने कहा है कि रूस को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल रूस का दौरा करेंगे और रूस पीएम मोदी का स्वागत करने के लिए उत्सुक है। लावरोव ने ‘इंडिया एंड रशिया: टुवर्ड्स अ न्यू बाइलेट्रल एजेंडा ’ (भारत और रूस: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर) शीर्षक वाले सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा, हम 2026 में प्रधानमंत्री मोदी के रूस दौरे का इंतजार कर रहे हैं। इस सम्मेलन को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी संबोधित किया है।
क्या बोले रूसी विदेश मंत्री?
लावरोव ने कहा, ‘रूस और भारत की दशकों पुरानी दोस्ती इस बात का एक आदर्श उदाहरण है कि दो देशों के बीच आपसी संबंध कैसे होने चाहिए और कैसे बनाए जा सकते हैं।’ उन्होंने यह भी कहा, ‘उच्चतम स्तर पर होने वाली भरोसेमंद बातचीत की भूमिका को कम करके आंकना मुश्किल है क्योंकि भारत और रूस का रिश्ता समानता, विश्वास और परस्पर सम्मान पर आधारित है।’ उन्होंने कहा कि रूस और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंध मजबूत और समय-परीक्षित दोस्ती पर आधारित हैं। उन्होंने नई दिल्ली और मॉस्को के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क जारी रहने की उम्मीद जताई।
भारतीय विदेश नीति को सराहा
सर्गेई ने कहा कि वर्तमान में व्यापार का 96 प्रतिशत राष्ट्रीय मुद्राओं में होता है। सर्गेई ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता की सराहना की और कहा कि भारत उभरती बहुध्रुवीय दुनिया में एक प्रमुख राजनीतिक और आर्थिक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव, खासकर फारस की खाड़ी में अमेरिका और इजरायल द्वारा उत्पन्न संकट के बीच, भारत के साथ द्विपक्षीय समन्वय महत्वपूर्ण है। सर्गेई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को समर्थन देने के लिए रूस तैयार है, खासकर इस साल भारत के ब्रिक्स अध्यक्षता संभालने के दौरान।
द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य
उल्लेखनीय है कि इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2030 तक 100 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य है। इसके लिए लॉजिस्टिक्स, तकनीक और निवेश में सहयोग बढ़ाया जाएगा, जैसे कि इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर और नॉर्दर्न सी रूट का विकास।
उल्लेखनीय है कि 2025 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 60 बिलियन डॉलर तक पहुंचा था। 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान भी दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय समन्वय बना रहेगा।
पुतिन ने दिया था पीएम मोदी को निमंत्रण
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने दिसंबर 2025 में भारत यात्रा के दौरान पीएम मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का न्योता दिया था।
पिछली यात्रा: पीएम मोदी ने जुलाई 2024 में रूस का दौरा किया था जहां उन्हें रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द अपोस्टल’ से सम्मानित किया गया था। हाल ही में अक्टूबर 2024 में भी पीएम मोदी ने रूस के कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था।
रूस दौरे के मुख्य मायने
रणनीतिक संतुलन (स्ट्रेटेजिक बैलेंस): भारत, अमेरिका के साथ करीबी संबंध रखते हुए भी रूस के साथ अपने पारंपरिक और पुराने संबंधों को कम नहीं कर रहा है। यह दर्शाता है कि भारत पश्चिम के दबाव में अपनी विदेश नीति नहीं बदलता।
ऊर्जा सुरक्षा (एनर्जी सिक्योरिटी): युद्ध की स्थिति में होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने का खतरा है। रूस, भारत के लिए तेल और ऊर्जा का एक सुरक्षित और भरोसेमंद स्रोत बना हुआ है।
मध्यस्थता की भूमिका (मीडिएशन रोल): रूस ने भारत को ईरान-इजरायल संकट को सुलझाने के लिए एक ‘प्रमुख वैश्विक शक्ति’ और सबसे महत्वपूर्ण वार्ताकार के रूप में देखा है क्योंकि भारत के सभी पक्षों (ईरान, इजरायल, अमेरिका) के साथ संबंध अच्छे हैं।
रक्षा और व्यापार (डिफेंस एंड ट्रेड): रूस भारत का बड़ा रक्षा भागीदार है। इस दौरे का उद्देश्य क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच रक्षा आपूर्ति और व्यापार को सुचारू रखना है।
• बहुध्रुवीय विश्व का संदेश (मैसेज ऑफ मल्टीपोलर वर्ल्ड): भारत यह स्पष्ट कर रहा है कि वह पश्चिमी गुट (यूएसए) या पूर्वी गुट (रूस/ईरान) में से किसी एक को नहीं चुन रहा बल्कि राष्ट्रीय हितों के आधार पर स्वतंत्र फैसले ले रहा है।













