ब्लिट्ज ब्यूरो
अजमेर। फर्जी डिग्री और दस्तावेजों के जरिए नौकरी पाने वाले गिरोहों पर लगाम लगाने के लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग के आग्रह पर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों की ओर से जारी की जाने वाली डिग्री, डिप्लोमा, मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट पर अनिवार्य रूप से क्यूआर कोड अंकित किया जाएगा।
आयोग के सचिव रामनिवास मेहता ने बताया कि भर्ती प्रक्रियाओं के दौरान बड़ी संख्या में संदिग्ध दस्तावेज सामने आते हैं, जिनकी जांच में लंबा समय लगता है। इसके निवारण एवं दस्तावेजों की पुष्टि के लिए विश्वविद्यालयों की ओर से जारी दस्तावेजों में विभिन्न परिवर्तन के लिए आयोग की ओर से राज्य सरकार को सुझाव भेजे गए थे। इस क्रम में तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से इस वर्ष 3 सितंबर को और उच्च शिक्षा विभाग की ओर से 26 सितंबर को राज्य के सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया जा चुका है।
रामनिवास मेहता ने बताया कि इन परिवर्तनों के फलस्वरूप भर्ती संस्थानों की ओर से अभ्यर्थियों के दस्तावेज की पुष्टि एक क्लिक पर संबंधित विश्वविद्यालय के मूल रिकार्ड से सीधे ही की जा सकेगी। इससे भर्ती प्रक्रिया में तेजी के साथ ही दस्तावेजों में किसी भी प्रकार की विसंगति को तुरंत पकड़ा जा सकेगा.
ऐसे रुकेगा फर्जीवाड़ा
डिजिटल वेरिफिकेशन ः डिग्री और सर्टिफिकेट पर छपे क्यूआर कोड को स्कैन करते ही अभ्यर्थी का पूरा रिकॉर्ड विश्वविद्यालय के डेटाबेस से मिलान किया जा सकेगा।
स्टैंडर्ड एनरोलमेंट सिस्टम ः सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे एनरोलमेंट (नामांकन) की एक मानक व्यवस्था लागू करें। अब प्रत्येक वर्ष विद्यार्थियों को वर्षवार और क्रमवार एनरोलमेंट नंबर आवंटित किए जाएंगे, जिससे रिकॉर्ड में हेराफेरी संभव नहीं होगी।
सभी दस्तावेजों पर लागू
नियम केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रोविजनल सर्टिफिकेट, माइग्रेशन और अन्य प्रमाण पत्रों पर भी लागू होगा।
भर्तियों में पारदर्शिता आएगी : आयोग सचिव
रामनिवास मेहता ने बताया कि भर्ती परीक्षाओं के बाद दस्तावेज सत्यापन के समय कुछ अभ्यर्थी बैक डेट में बनी फर्जी डिग्रियां पेश करने का आपराधिक कृत्य करते पाये गए हैं। नई व्यवस्था से न केवल पारदर्शिता, बल्कि दस्तावेजों की प्रमाणिकता डिजिटली वेरीफाइड होने से भर्ती प्रक्रिया में भी तेजी आएगी।

























