ब्लिट्ज ब्यूरो
सहारनपुर। जानलेवा मलेरिया के खिलाफ जंग में सहारनपुर जल्द ही प्रदेश का पहला मलेरिया मुक्त जिला घोषित होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पिछले चार वर्षों से यहां मलेरिया का कोई मामला नहीं पाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया मुक्त घोषित करने के मानकों को पूरा करते हुए प्रदेश मुख्यालय को अनुशंसा भेज दी है। अब दिल्ली से केंद्रीय डब्ल्यूएचओ की संयुक्त टीम जल्द ही जिले का दौरा करेगी, जिसके बाद केंद्रीय स्तर से घोषणा की जाएगी।
नेशनल वैक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल कार्यक्रम के अंतर्गत डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया आदि की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर अभियान चलाए गए हैं।
पिछले चार वर्षों में मलेरिया का कोई केस नहीं मिलने के कारण यह उपलब्धि महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पहले जिले में हर वर्ष दो हजार से अधिक मलेरिया के मामले सामने आते थे। विभाग की ओर से मलेरिया पर नियंत्रण के लिए चलाए गए अभियानों में इसे प्राथमिकता दी गई। पीएचसी और सीएचसी के अलावा एसबीडी जिला चिकित्सालय द्वारा स्वास्थ्य कर्मियों के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाए गए। जिन क्षेत्रों में मलेरिया के अधिक मामले सामने आते थे, वहां मच्छरों के पनपने वाले स्थानों की पहचान की गई।
इसके साथ ही, यदि किसी व्यक्ति को मलेरिया हो जाता था, तो उसे समय पर उचित इलाज और दवा उपलब्ध कराई गई। आशाओं को अपने-अपने क्षेत्र में मलेरिया जांच के लिए प्रशिक्षित किया गया, जिससे बुखार के प्रकार का पता लगाकर त्वरित कार्रवाई की जा सके।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में पिछले चार वर्षों से मलेरिया का कोई केस नहीं पाया गया है। इस संबंध में रिपोर्ट लखनऊ मुख्यालय को भेजी गई है, और लखनऊ से अनुशंसा दिल्ली स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई है। मलेरिया मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया केंद्रीय स्तर पर होती है। डब्ल्यूएचओ और केंद्रीय टीम द्वारा जिले का दौरा किया जाएगा, और इन दोनों की अनुशंसा के बाद केंद्रीय स्तर से घोषणा की जाएगी।
चार साल से कोई केस नहीं
मलेरिया का जिले में चार वर्ष से कोई केस नहीं मिला है और इसकी रिपोर्ट लखनऊ मुख्यालय भेजी जा चुकी है। केंद्रीय स्तर से ही कोई घोषणा होगी।
शिवांका गौड़, जिला मलेरिया अधिकारी।
































