ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका (यूएसए) में इमिग्रेशन पर बहुत सख्ती है लेिकन वास्तविकता यह है कि सऊदी अरब ने अमेरिका से ज्यादा भारतीयों को डिपोर्ट किया है। डिपोर्टेशन के कारणों में गैर-कानूनी बॉर्डर क्रॉसिंग के बजाय वीजा ओवरस्टे व लेबर लॉ तोड़ना शामिल है।
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने एक लिखित जवाब में कहा, विदेश में भारतीयों को हिरासत में लेने और डिपोर्ट करने के कई कारण हैं जिनमें वीज़ा या रेज़िडेंसी कार्ड की वैलिडिटी से ज़्यादा समय तक रहना, बिना वर्क परमिट के काम करना, लेबर नियमों का उल्लंघन करना, एम्प्लॉयर से भागना और सिविल या क्रिमिनल केस का सामना करना वगैरह शामिल हैं।
एक सरकारी जवाब के मुताबिक, 2021 से 2025 तक दुनिया भर में सबसे ज़्यादा भारतीय नागरिकों का डिपोर्टेशन सऊदी अरब में हुआ है। रियाद में भारतीय मिशन के दिए गए डेटा से पता चलता है कि 2021 में 8,887 भारतीयों को डिपोर्ट किया गया, इसके बाद 2022 में 10,277, 2023 में 11,486 और 2024 में 9,206 भारतीयों को डिपोर्ट किया गया। राज्यसभा में पेश किए गए विदेश मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में 81 देशों से 24,600 से अधिक भारतीयों को डिपोर्ट किया गया। सबसे अधिक डिपोर्टेशन अमेरिका से नहीं, बल्कि सऊदी अरब से हुए। सऊदी ने 12 महीनों में कुल 11,000 से अधिक भारतीयों को डिपोर्ट किया। इसकी तुलना में यूएसए से भारतीय नागरिकों के डिपोर्टेशन की संख्या काफी कम है। अमेरिका में भारतीय मिशनों से मिले विदेश मंत्रालय के डेटा के मुताबिक वाशिंगटन डीसी मिशन ने भारतीय नागरिकों के ये डिपोर्टेशन रिपोर्ट किए: 2021 में 805, 2022 में 862, 2023 में 617, 2024 में 1,368, और सऊदी अरब की तुलना में साल 2025 में अमेरिका ने केवल 3,800 भारतीयों को डिपोर्ट किया।
इसकी तुलना में, अमेरिका में दूसरे भारतीय मिशनों, जैसे कि सैन फ्रांसिस्को, न्यूयॉर्क, अटलांटा, ह्यूस्टन और शिकागो द्वारा बताए गए डिपोर्टेशन के आंकड़े आमतौर पर डबल डिजिट या कम सैकड़ों में रहते हैं जो खाड़ी देशों के लेवल से बहुत नीचे रहते हैं।
यूएस में भारतीयों का सबसे ज़्यादा डिपोर्टेशन वाशिंगटन डीसी (3,414) और ह्यूस्टन (234) से हुआ। दूसरे देश जिन्होंने बड़ी संख्या में भारतीयों को डिपोर्ट किया उनमें म्यांमार (1,591), यूएई (1,469), बहरीन (764), मलेशिया (1,485), थाईलैंड (481), और कंबोडिया (305) शामिल हैं।
सरकार विदेश में भारतीय नागरिकों की सिक्योरिटी व भलाई को प्राथमिकता देती है। भारतीय मिशन नागरिकों के बचाव और वापसी के मुद्दे को तत्परता से उठाते हैं।































